इस्लामाबाद: भीख मांगने में पाकिस्तान सुपरस्टार साबित हुआ है। निर्लज्जता और बेशर्मी की सारी हदें पार करते हुए पाकिस्तान लगातार भीख पर भीख मांगे जा रहा है। कभी वह सऊदी अरब से, कभी यूएई से, कभी अमेरिका से तो कभी अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भीख का कटोरा लिए खड़ा दिखता है। इस बार पाकिस्तान ने फिर गिड़गिड़ा कर आईएमएफ से 1.2 अरब डॉलर की भीख हासिल कर ली है, लेकिन सवाल वही है कि आखिर कब तक पाकिस्तान भीख मांगकर अपना काम चलाता रहेगा?
पाकिस्तान को इस बार कैसे मिली भीख?
पाकिस्तान ने आईएमएफ के साथ इस बार दो अलग-अलग व्यवस्थाओं के तहत कुल 1.2 अरब डॉलर की राशि के लिए प्रारंभिक समझौता किया है। आईएमएफ ने शनिवार को बताया कि दोनों पक्षों ने विस्तारित कोष सुविधा की तीसरी समीक्षा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए शुरू की गई रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) की दूसरी समीक्षा सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। आईएमएफ के प्रतिनिधिमंडल ने 25 फरवरी से 2 मार्च तक कराची और इस्लामाबाद में पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ चर्चा की थी, लेकिन उस समय कोई समझौता नहीं हो सका था। इसके बाद बातचीत ऑनलाइन जारी रही और अंत में दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई। आईएमएफ ने अपने बयान में कहा कि उसके अधिकारियों और पाकिस्तान सरकार के अधिकारियों के बीच दोनों सुविधाओं की समीक्षा पर सहमति हो गई है।
पाकिस्तान को मिलेंगे 21 करोड़ डॉलर
पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने भी पुष्टि की कि 37 महीने की ईएफएफ व्यवस्था और 28 महीने की आरएसएफ व्यवस्था की समीक्षा पर सहमति बन गई है। आईएमएफ की मिशन प्रमुख इवा पेट्रोवा ने कहा कि बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद पाकिस्तान को ईएफएफ के तहत लगभग 1 अरब डॉलर और आरएसएफ के तहत करीब 210 मिलियन डॉलर (21 करोड़ डॉलर) की राशि मिल सकेगी। पाकिस्तान वर्ष 2024 में आईएमएफ के 7 अरब डॉलर के विस्तारित कोष सुविधा (EFF) कार्यक्रम में शामिल हुआ था।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, बाजार में विश्वास बहाल करना, राजकोषीय सुधारों को जारी रखना और ऊर्जा क्षेत्र की अक्षमताओं को कम करना है। पिछले साल पाकिस्तान को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, आपदा प्रबंधन को मजबूत करने, जल दक्षता बढ़ाने और हरित वित्तपोषण को प्रोत्साहन देने के लिए रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) के तहत 1.4 अरब डॉलर की सुविधा मिली थी।
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