बैंकॉक: थाईलैंड की प्रमुख विपक्षी पार्टी फ्यू थाई ने शुक्रवार को एक नया अध्याय लिखते हुए जुलापुन अमोर्नविवाट को नया नेता चुना है। फ्यू थाई पार्टी ने यह कदम पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा की बेटी पेटोंगटार्न शिनावात्रा के इस्तीफे के बाद उठाया है। यह बदलाव थाई राजनीति में शिनावात्रा परिवार के दशकों पुराने वर्चस्व पर सवाल को चुनौती दे रहा है, जो लंबे समय से सैन्य-समर्थित अभिजात वर्ग के निशाने पर रहा है।
पेटोंगटार्न को देना पड़ा था इस्तीफा
द डेली स्टार की खबर के अनुसार इससे पहले 39 वर्षीय पेटोंगटार्न शिनावात्रा पिछले सप्ताह पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। अगस्त में एक अदालत ने कंबोडिया के साथ सीमा विवाद से जुड़े नैतिक उल्लंघन के आरोप में उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटा दिया था। विश्लेषकों का मानना है कि यह इस्तीफा रणनीतिक था, जिसका उद्देश्य पार्टी को आगामी कानूनी चुनौतियों से बचाना था। एक प्रमुख राजनीतिक विश्लेषक ने कहा कि "यह शिनावात्रा राजवंश के राजनीतिक प्रभुत्व के अंत की शुरुआत हो सकती है।
कौन हैं जुलापुन
पार्टी के आधिकारिक फेसबुक लाइवस्ट्रीम के दौरान सदस्यों ने जुलापुन को भारी बहुमत से नया नेता चुना है। 50 वर्षीय जुलापुन, उत्तरी चियांग माई प्रांत के सांसद हैं, जो फ्यू थाई का मजबूत गढ़ माना जाता है। वह पूर्व उप प्रधानमंत्री और उप-वित्त मंत्री भी रहे हैं। वोटिंग के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "मुझे इस विशेषाधिकार को प्राप्त करने पर गहरा सम्मान महसूस हो रहा है। सभी सदस्यों का विश्वास मेरे लिए प्रेरणा स्रोत है।" जुलापुन दिग्गज राजनेता सोमपोंग अमोर्नविवाट के बेटे हैं, जिन्होंने 2019 में पार्टी का नेतृत्व किया और उप-प्रधानमंत्री रहे।
पार्टी के अति सक्रिय नेता
जुलापुन ने 2023 चुनाव से पहले पार्टी की प्रमुख नीतियों को बढ़ावा दिया, जिसमें लगभग 300 डॉलर का प्रोत्साहन वितरण और कैसिनो वैधीकरण शामिल था। हालांकि, पर्यवेक्षक चेतावनी देते हैं कि जुलापुन का नेतृत्व भी थाकसिन के प्रभाव से मुक्त नहीं होगा। 76 वर्षीय थाकसिन ने 1990 के दशक में फ्यू थाई की नींव रखी। 2006 के सैन्य तख्तापलट के बाद निर्वासन में रहे। वर्तमान में वे भ्रष्टाचार के आरोप में जेल काट रहे हैं। शिनावात्रा परिवार दो दशकों से प्रो-सैन्य, प्रो-राजशाही अभिजात वर्ग का प्रमुख विरोधी रहा है, जो उनकी पॉपुलिस्ट नीतियों को सामाजिक व्यवस्था के लिए खतरा मानते हैं।
यह बदलाव थाईलैंड की अस्थिर राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, जहां सैन्य प्रभाव अभी भी हावी है। फ्यू थाई की लोकप्रियता युवाओं और ग्रामीण मतदाताओं पर निर्भर है, लेकिन कानूनी बाधाएं पार्टी को कमजोर कर रही हैं। क्या जुलापुन परिवार के छत्रछाया से बाहर निकल पाएंगे? आने वाले महीने इसका जवाब देंगे।
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