तिब्बत से आया मौत का सैलाब! नेपाल में मची भारी तबाही, 98 की मौत; 133 भारतीयों समेत सैकड़ों लापता
तिब्बत से आए भीषण फ्लैश फ्लड ने नेपाल में भारी तबाही मचाई है। भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ से दर्जनों लोगों की मौत और सैकड़ों के लापता होने की खबर है। इस तबाही की चपेट में कैलाश मानसरोवर के यात्री भी आए हैं।

Highlights
- तिब्बत से आए सैलाब ने नेपाल में मचाई तबाही, 133 भारतीयों समेत सैकड़ों लोग लापता।
- भोटेकोशी नदी में अचानक आए सैलाब में घर, दुकानें, पुल और पावर प्रोजेक्ट बह गए।
- कैलाश यात्रियों के 77 लोग ग्यिरोंग इमिग्रेशन सेंटर पर थे, सभी की तलाश जारी है।
काठमांडू/नई दिल्ली: नेपाल से बुधवार को आई बाढ़ की तस्वीरें तबाही का डरावना मंजर दिखा रही हैं। तिब्बत से आया भीषण फ्लैश फ्लड भोटेकोशी नदी में इतनी तेजी से पहुंचा कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। लोग रोजमर्रा के काम में जुटे थे, लेकिन कुछ ही सेकेंड बाद सैकड़ों फीट ऊंचा पानी का सैलाब उनके सामने था। देखते ही देखते चीख-पुकार मच गई और लोग जान बचाने के लिए भागने लगे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पानी का बहाव इतना तेज था कि करीब 30 सेकेंड में 2 बड़े बाजारों का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया। इस हादसे में अभी तक 98 लोगों की जान जाने की खबर है और मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
3 पुलिस चौकियों और कई पुलों को पहुंचा नुकसान
बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सैलाब में घर और दुकानें बह गईं, गाड़ियां डूब गईं और कई इमारतें मलबे के साथ बहती नजर आईं। भोटेकोशी नदी के रास्ते में आने वाला लगभग हर ढांचा इस सैलाब की चपेट में आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 3 पुलिस चौकियों, कई पुलों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है। सड़कों और दूसरे जरूरी बुनियादी ढांचे का भी बड़ा हिस्सा तबाह हुआ है। सैटेलाइट तस्वीरों में भी नदी के रास्ते में आने वाली इमारतों और सड़कों के बड़े हिस्से के मिटने का संकेत मिला है।
आपदा से मरने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी
नेपाल में इस आपदा से मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बुधवार रात तक अलग-अलग रिपोर्टों में 98 से ज्यादा मौतों की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 750 लोग लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव एजेंसियां अभी भी प्रभावित इलाकों में लोगों की तलाश कर रही हैं। लापता लोगों में नेपाल पुलिस और आर्म्ड पुलिस फोर्स के जवान भी शामिल हैं। शुरुआती रिपोर्टों में 50 से ज्यादा सुरक्षा कर्मियों के लापता होने की बात सामने आई थी। रसुवा के उत्तरी इलाके में बॉर्डर आउटपोस्ट पर तैनात नेपाल आर्म्ड पुलिस फोर्स के 4 जवान भी बाढ़ के बाद से लापता बताए गए हैं।
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, 750 यात्री लापता हैं। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। विदेशी नागरिकों में 133 भारतीय हैं और 37 एनआरआई भी लापता बताए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले लोगों की है।
आखिर कैसे आया इतना खतरनाक सैलाब?
नेपाल में तबाही मचाने वाले इस फ्लैश फ्लड की वजह को लेकर जांच चल रही है। नेपाल के अधिकारियों और वैज्ञानिकों के शुरुआती आकलन के मुताबिक, तिब्बत-नेपाल सीमा के पास आए 4.4 तीव्रता के भूकंप ने पहाड़ी इलाके में बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से को अस्थिर किया हो सकता है। इसके बाद आइस-रॉक एवलॉन्च हुआ और नदी का रास्ता अस्थायी रूप से बंद हो गया। इसके पीछे ग्लेशियर से जुड़ी घटना और अचानक पानी जमा होने की संभावना की भी जांच की जा रही है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, बर्फ, चट्टानों और मलबे से नदी का रास्ता रुकने पर पानी जमा होता गया। जब यह प्राकृतिक अवरोध टूटा तो पानी, कीचड़ और बड़े-बड़े पत्थरों का भारी सैलाब बेहद तेजी से नीचे की ओर आया। अभी यह पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ है कि भूकंप ही इस घटना का सीधा कारण था। वजह जो भी रही हो लेकिन शांत दिख रही नदी अचानक बेहद खतरनाक बन गई। लोगों के पास सुरक्षित जगह पहुंचने के लिए बहुत कम समय था और जो भी इसके रास्ते में आया उसका वजूद मिटता चला गया।
कई कैलाश यात्री भी बाढ़ की चपेट में आए
इस तबाही का सबसे दर्दनाक पहलू कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए यात्रियों से जुड़ा है। जिस समय फ्लैश फ्लड तिब्बत से नेपाल की ओर आया, उस समय 77 कैलाश यात्री तिब्बत-नेपाल इमिग्रेशन सेंटर पर मौजूद थे। सदगुरु जग्गी वासुदेव ने बताया है कि उनके कैलाश यात्रा समूह के लोग वापस लौटते समय ग्यिरोंग के इमिग्रेशन ऑफिस में थे। इसी दौरान अचानक बाढ़ आई। उनके मुताबिक, 5 मंजिला इमिग्रेशन सेंटर भी पानी के तेज बहाव की चपेट में आया और वहां मौजूद लोगों के बारे में अभी आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाई है।
सदगुरु के मुताबिक, उनकी यात्रा में कुल 21 समूह शामिल थे। इनमें 495 लोग सुरक्षित वापस लौट चुके हैं, जबकि 743 लोग अभी तिब्बत में, 148 लोग नेपाल में और 77 लोग इमिग्रेशन सेंटर पर थे। इसके अलावा नेपाल के तिमुरे में 3 स्वयंसेवक भी मौजूद थे। सदगुरु ने कहा कि वह खुद क्षेत्र में मौजूद हैं और अधिकारियों के साथ मिलकर बचाव अभियान में हर संभव मदद की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने प्रभावित परिवारों से कहा कि इस मुश्किल घड़ी में उनका दर्द समझा जा सकता है और लोगों को बचाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
नेपाल में युद्धस्तर पर जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन
नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और आर्म्ड पुलिस फोर्स ने प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान तेज कर दिया है। हेलीकॉप्टरों के जरिए दर्जनों लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। नेपाली सेना ने कई हेलीकॉप्टर खोज और बचाव के लिए लगाए हैं, जबकि ड्रोन और स्निफर डॉग्स की भी मदद ली जा रही है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने आपात बैठक बुलाकर हालात की समीक्षा की है।
गृह मंत्री ने लोगों से निचले इलाकों से निकलकर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की है। काठमांडू से प्रभावित इलाकों की तरफ जाने वाले कई रास्तों पर आवाजाही भी रोकी गई है। लोग अपने परिवार और रिश्तेदारों की जानकारी जुटाने में लगे हैं। कई इलाकों में सड़क, बिजली और संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण सही जानकारी हासिल करना मुश्किल हो रहा है।
भारत ने नेपाल की मदद के लिए बढ़ाया हाथ
इस आपदा के बाद भारत ने नेपाल को हर संभव मदद का भरोसा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात की और राहत-बचाव के लिए भारत की तरफ से पूरी मदद का आश्वासन दिया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत ने नेपाल के लिए 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी है। इसके अलावा भारतीय वायुसेना का C-17 ग्लोबमास्टर राहत सामग्री और आधुनिक बचाव उपकरण लेकर काठमांडू के लिए रवाना होने वाला है। नेपाल में फंसे या प्रभावित भारतीय नागरिकों के परिवारों के लिए भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं:
- +977-985-131-6807
- +977-970-910-7500
इन नंबरों पर नेपाल में प्रभावित भारतीय नागरिकों के बारे में जानकारी ली जा सकती है।
बिहार और यूपी में बाढ़ को देखते हुए अलर्ट
तिब्बत और नेपाल में तबाही मचाने के बाद अब भारत में भी बाढ़ के असर को लेकर चिंता बढ़ गई है। भोटेकोशी और दूसरी नदियों से बढ़ा पानी आगे गंडक नदी के रास्ते भारत की ओर पहुंच रहा है। बिहार में पश्चिम चंपारण समेत 6 जिलों को अलर्ट पर रखा गया है। गंडक नदी पश्चिम चंपारण के बाद पूर्वी चंपारण, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली से होते हुए गंगा में मिलती है। उत्तर प्रदेश में कुशीनगर, महाराजगंज और देवरिया पर भी नजर रखी जा रही है। गंडक नदी में पानी बढ़ने के खतरे को देखते हुए वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं और नहरों में ज्यादा पानी छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी की जा रही है।
NDRF और SDRF की टीमें पूरी तरह तैयार
NDRF और SDRF की टीमें संवेदनशील इलाकों में तैनात हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से फोन पर बात कर हर संभव मदद का भरोसा दिया है। दिल्ली से NDRF की अतिरिक्त टीमें भी तैयार की गई हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हालात पर नजर रखने के लिए हाई लेवल टीम बनाई है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर वह खुद पश्चिम चंपारण जाएंगे। NDRF कमांडेंट ज्ञानेश्वर सिंह के मुताबिक, बिहार और उत्तर प्रदेश में मिलाकर 9 टीमें तैनात की गई हैं। गंडक के किनारे कुशीनगर, पश्चिम चंपारण और मुजफ्फरपुर में ज्यादा टीमें लगाई गई हैं। हालांकि बाढ़ का असर कितने इलाकों तक पहुंचेगा और कितना गंभीर होगा, यह अभी पूरी तरह साफ नहीं है।
चीन ने बाढ़ की जानकारी देने में की देरी?
इस आपदा के बाद चीन की तरफ से नेपाल को बाढ़ की जानकारी देने में कथित देरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ शुरुआती रिपोर्टों में दावा किया गया है कि नेपाल को सैलाब की जानकारी करीब 45 मिनट की देरी से मिली। नेपाल में यह सवाल उठाया जा रहा है कि अगर पानी के अचानक बढ़ने की जानकारी समय पर मिल जाती तो लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए कुछ अतिरिक्त समय मिल सकता था। हालांकि इस दावे और अलर्ट की टाइमिंग को लेकर आधिकारिक स्तर पर पूरी तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है। नेपाल के कुछ विशेषज्ञों ने यह आशंका भी जताई है कि ऊपरी हिस्से में मौजूद प्राकृतिक अवरोध के कारण दूसरे फ्लैश फ्लड का खतरा हो सकता है।
लापता लोगों को ढूंढ़ने पर है पूरा फोकस
तिब्बत से नेपाल तक आए इस सैलाब ने कुछ ही मिनटों में बड़े इलाके का नक्शा बदल दिया। पुल, सड़कें, घर, बाजार और बिजली परियोजनाएं बर्बाद हो गईं। सबसे बड़ी चिंता अब उन सैकड़ों लोगों की है, जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले लोगों की संख्या भी बड़ी है। ग्यिरोंग इमिग्रेशन सेंटर पर मौजूद 77 यात्रियों को लेकर भी परिवारों की चिंता लगातार बढ़ रही है। रेस्क्यू टीमें मलबे और कीचड़ के बीच लोगों की तलाश कर रही हैं। नेपाल और चीन दोनों तरफ बचाव अभियान चल रहा है, लेकिन तबाही का पैमाना इतना बड़ा है कि राहत और बचाव दलों के सामने चुनौती बेहद कठिन है।
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