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अमेरिका ने ईरान पर किया हमला तो होंगे गंभीर नतीजे, वैश्विक परमाणु संकट भड़कने का है खतरा

अमेरिका ईरान पर संभावित हमले की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को फिर धमकी दी है साथ ही यह भी कहा है कि तेहरान के लिए समय खत्म हो रहा है और जल्द समझौता होना चाहिए।

डोनाल्ड ट्रंप (L), अयातुल्ला अली खामेनेई (R) - India TV Hindi
Image Source : AP डोनाल्ड ट्रंप (L), अयातुल्ला अली खामेनेई (R)

America-Iran Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को चेतावनी दी है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया, "एक बहुत बड़ा बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है। यह तेजी से, बहुत ताकत, जोश और मकसद के साथ आगे बढ़ रहा है। यह वेनेजुएला भेजे गए बेड़े से भी बड़ा बेड़ा है। उम्मीद है कि ईरान जल्द ही बातचीत की मेज पर आएगा और समझौता करेगा, कोई परमाणु हथियार नहीं, जो सभी पक्षों के लिए अच्छा हो। समय खत्म हो रहा है, यह सच में बहुत जरूरी है! जैसा कि मैंने ईरान से पहले भी कहा था, समझौता करो! उन्होंने नहीं किया, और ऑपरेशन मिडनाइट हैमर हुआ, जिससे ईरान में बहुत तबाही हुई। अगला हमला इससे कहीं ज्यादा बुरा होगा! ऐसा दोबारा मत होने दो। इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद!"

'हमला बहुत विनाशकारी होगा'

ट्रंप ने इससे पहले 28 जनवरी 2026 को कड़ी चेतावनी जारी की थी, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि ईरान अमेरिका की मांगों पर बातचीत के लिए आगे नहीं आता, तो अगला हमला बहुत अधिक विनाशकारी होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए "मैसिव आर्मडा" का जिक्र किया था। उन्होंने इसे मिशन पूरा करने के लिए तैयार बताया था।

क्या है ईरान की स्थिति?

अमेरिका की ओर से भले ही ईरान को बार-बार धमकी दी जा रही है लेकिन संघर्ष से मसले को सुलझाना आसान नहीं होने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान एक 'थ्रेशोल्ड स्टेट' है जिसके पास परमाणु हथियार बनाने की तकनीकी क्षमता है लेकिन अभी अंतिम कदम नहीं उठाया गया है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से वैश्विक परमाणु प्रसार का खतरा बढ़ सकता है, क्योंकि कई ऐसे देश हैं जिन्हें लग सकता है कि 'थ्रेशोल्ड' स्थिति या समझौते सुरक्षा नहीं देते। इससे IAEA की विश्वसनीयता भी प्रभावित हो सकती है। क्षेत्रीय अस्थिरता का बढ़ना तो तय माना जा रहा है।

अमेरिका कर रहा हमले की तैयारी?

पेंटागन ने हाल ही में यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को मध्य पूर्व क्षेत्र में भेजा है, जिसमें डिस्ट्रॉयर, फाइटर जेट्स, बॉम्बर और अन्य सैन्य साजो-सामान शामिल हैं। यह तैनाती ईरान पर दबाव बनाने और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि समय तेजी से खत्म हो रहा है और उसे "नो न्यूक्लियर वेपन्स" वाली "फेयर एंड इक्विटेबल डील" पर सहमत होना चाहिए। चलिए ऐसे में एक नजर अमेरिकी प्रशासन की प्रमुख मांगें पर भी डाल लेते हैं जो इस प्रकार हैं।

  • ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को स्थायी रूप से समाप्त करना और मौजूदा स्टॉकपाइल का निपटान।
  • बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास और रेंज पर सख्त सीमाएं।
  • मध्य पूर्व में प्रॉक्सी ग्रुप्स जैसे हमास, हिजबुल्लाह और हूतियों को समर्थन पूरी तरह बंद करना।

Image Source : apAmerican Aircraft Carrier USS Abraham Lincoln

ईरान ने दिया है कड़ा जवाब

इस बीच यहां यह भी बता दें कि, ईरान की कमजोर अर्थव्यवस्था और जनवरी 2026 में देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका इसे दबाव बनाने का मौका मान रहा है। ईरान ने अमेरिका की धमकियों का कड़ा जवाब दिया है। तेहरान के शीर्ष राजनयिकों ने कहा कि कोई भी अमेरिकी हमला जवाबी कार्रवाई को ट्रिगर करेगा, जिसमें अमेरिकी ठिकानों और विमानवाहकों पर हमले शामिल हो सकते हैं। ईरान ने बातचीत के लिए तैयार रहने की बात भी कही है। 

तेजी से बदल रहे हैं हालात

फिलहाल, ट्रंप प्रशासन ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है लेकिन सैन्य विकल्पों पर विचार जारी है। ईरान ने जवाबी तैयारी की बात कही है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय तनाव कम करने की अपील कर रहा है। हालात तेजी से बदल रहे हैं और किसी भी ओर से की गई छोटी सी गलती पूरे क्षेत्र को जंग की आग में झोंक सकती है।

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