वाशिंगटन: सुरक्षा विशेषज्ञों ने पेरिस में हुए आतंकी हमलों को वर्ष 2008 में मुंबई पर किए गए हमलों की ही नकल बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना सबके सामने मौजूद आतंकवाद के खतरे के प्रति पश्चिमी देशों के रूख को बदलकर रख सकती है। फ्रांस की राजधानी में विभिन्न स्थानों पर और फुटबॉल मैच के आयोजक स्टेडियम पर आतंकियों द्वारा किए गए हमलों में 120 से ज्यादा लोग मारे गए। न्यू यॉर्क पुलिस विभाग के खुफिया एवं आतंकवाद रोधी उपायुक्त जॉन मिलर ने सीएनएन को दिए साक्षात्कार में कहा कि सस्ते संसाधनों के इस्तेमाल के लिहाज से पेरिस के हमले मुंबई आतंकी हमले जैसे हैं। इसके अलावा अन्य कई मामलों में भी ये हमले 26/11 के हमलों से मेल खाते हैं।
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय सुरक्षा कार्यक्रम के प्रमुख ब्रूस हॉफमैन ने मशहूर नेशनल पब्लिक रेडियो को दिए साक्षात्कार में अलकायदा के नेता ओसामा बिन लादेन द्वारा पांच साल पहले किए गए उस आह्वान का हवाला दिया, जिसमें मुंबई जैसा हमला यूरोप में करने के लिए कहा गया था। राष्ट्रीय आतंकवादरोधी केंद्र के पूर्व निदेशक माइकल लीटर ने एनबीसी न्यूज को बताया, इन हमलों में जटिलता का जो स्तर है, वह हमने वर्ष 2008 में मुंबई पर बोले गए हमले के बाद से किसी शहरी इलाके में नहीं देखा। उन्होंने कहा, यह हमला पश्चिमी देशों द्वारा इस खतरे को देखे जाने के नजरिए को बदलने वाला साबित होगा।
न्यूजमैक्स टीवी को दिए गए साक्षात्कार में वायुसेना के सेवानिवृत्त जनरल माइकल हेडन ने कहा कि पेरिस में हुई हिंसा निश्चित तौर पर एक आतंकी हमला थी और हमारे डरों ने वास्तविक रूप धारण कर लिया क्योंकि ये हमले वर्ष 2008 में मुंबई में हुए हमलों की ही छवि पेश करते हैं। हेडन ने कहा, हमें भारी आशंका थी कि हम उस हमले जैसे ही अन्य हमले देख सकते हैं । यह आशंका सच हो गई है और आज रात हम पेरिस में ऐसा होते देख रहे हैं।
उन्होंने कहा, यह मुक्त समाजों की नाजुकता को दर्शाता है। यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के कारण हम सबके सामने कितना बड़ा खतरा है। आरएएनडी कॉरपोरेशन के बी एम जेंकिन्स ने पे्रस एंटरप्राइज नामक अखबार को बताया कि पेरिस में हुए हमले नवंबर 2008 में बेहद भीड़भाड़ वाले मुंबई शहर पर बोले गए हमलों की याद दिलाते हैं। मुंबई हमलों के दौरान इस्लामी आतंकी संगठन से जुड़े समूहों ने सिलसिलेवार एवं समन्वित ढंग से गोलीबारी और बमबारी को अंजाम दिया था। यह घटनाक्रम चार दिन तक चला था।
जेंकिन्स ने कहा, इस तरह के हमले दृढ़ निश्चय और हथियार हासिल कर पाने की क्षमता पर आधारित होते हैं। उन्होंने कहा, इनमें से कुछ यूरोपीय देशों में, आपराधिक संपर्कों वाला कोई भी व्यक्ति एके-47 हासिल कर सकता है। रेस्तरां में खाना खा रहे लोगों या रॉक कॉन्सर्ट देखने आए लोगों को गोली मारने के लिए कोई खास कौशल जरूरी नहीं होता। इसके लिए आपको प्रशिक्षण लेने की जरूरत नहीं पड़ती। डब्ल्यूबीजेड-टीवी के सुरक्षा विश्लेषक एड डेविस ने कहा कि पेरिस हमले मुंबई में हुए आतंकी हमले से मेल खाते हैं। डेविस ने कहा, हमें इसी बात का सबसे ज्यादा डर था कि अलग-अलग स्थानों पर एक साथ कई दलों द्वारा मुंबई जैसा हमला किया जा सकता है।
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