संयुक्त राष्ट्र : भारत ने मंगलवार को इजरायल के साथ शांति वार्ता के जरिए स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र को समर्थन देने का संकल्प लिया और दोनों ही देशों से समस्या के समग्र समाधान के लिए शांति प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की अपील की।
गौरतलब है कि इससे ठीक पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी इस बात को दोहराया था कि फिलिस्तीन को लेकर नई दिल्ली की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के उपस्थायी प्रतिनिधि भगवंत एस. बिश्नोई ने एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान कहा, "हमारा यह दृढ़ विश्वास है कि फिलिस्तीन मुद्दे के न्यायसंगत, स्थायी और व्यापक शांतिपूर्ण समाधान के लिए वार्ता एकमात्र व्यवहार्य विकल्प है।
हम सभी से संयम बरतने, उकसाहट और एकतरफा कदम उठाने से बचने तथा शांति प्रक्रिया फिर से शुरू करने की अपील करते हैं।"
यह नपा-तुला बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल्द इजरायल दौरे पर जाने की घोषणा के ठीक दो दिन बाद आया है। वह इजरायल का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। मोदी के दौरे का खुलासा करते हुए सुषमा ने रविवार को कहा था, "फिलिस्तीन को लेकर भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।"
बिश्नोई ने संयुक्त राष्ट्र में कहा, "भारत बातचीत के जरिए समस्या के समाधान का समर्थन करता है, जिससे संप्रभु, स्वतंत्र, व्यवहार्य और संयुक्त फिलिस्तीन का गठन होगा और सुरक्षित एवं स्वीकृत सीमा के अंदर पूर्वी जेरूसलम इसकी राजधानी होगी।"
मंगलवार का सम्मेलन फिलिस्तीनी शरणाíथयों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी के 65 साल पूरे होने पर आयोजित हुआ था। इस दौरान बिश्नोई ने कहा, "65 साल गुजर जाने के बावजूद फिलिस्तीन के सवाल का मैत्रीपूर्ण समाधान नहीं निकल पाया है।"
उन्होंने कहा कि भारत यूएनआरडब्ल्यूए को हर वर्ष 10 लाख डॉलर का योगदान देता है और इसने गाजा को लेकर नेशनल अर्ली रिकवरी एंड रिकंस्ट्रक्शन प्लान के लिए 40 लाख डॉलर देने का वादा किया है। साथ ही यह फिलिस्तीन में विकास कार्यो को लेकर ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ काम कर रहा है।
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