संयुक्त राष्ट्र: ईरान में वर्ष 2005 से फांसी की सजा देने में घातक दर से बढ़ोतरी हो रही है और इस साल इसके 1,000 के आंकड़े को पार कर जाने की आशंका है क्योंकि देश ने मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। यह बात संयुक्त राष्ट्र के एक जांचकर्ता ने कही।
अहमद शहीद ने महासभा को दी रिपोर्ट में और पत्रकार वार्ता में कहा कि दुनिया के किसी और मुल्क की तुलना में ईरान में आबादी के लिहाज से ज्यादा लोगों को फांसी दी जाती है। उन्होंने कहा कि फांसी की सजा के अधिकतर मामले अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हैं जो गैर हिंसक अपराधों और किशोरों को फांसी देने पर रोक लगाते हैं।
शहीद ने ईरान से उन मामलों में फांसी की सजा देने में रोक लगाने की गुजारिश की । उन्होंने कहा कि फांसी सिर्फ बहुत ही गंभीर अपराधों में दी जानी चाहिए जहां यह साबित होता हो कि इरादा ही हत्या करने का था और नतीजतन जान का नुकसान हुआ। वह ईरान में मानवाधिकार स्थिति मामले के विशेष जांचकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि हैरान कर देने वाला है कि ईरान में 2014 में 753 लोगों को फांसी की सजा दी जो अब तक सबसे ज्यादा है। उन्होंने कहा कि 2015 के पहले सात महीने में कम से कम 694 व्यक्तियों को फांसी देने की खबर है। कई मानवाधिकार संगठनों की अब की रिपोर्ट कहती है कि पिछले दस महीनों में 800 से ज्यादा व्यक्तियों को फांसी दी गई है। शहीद ने कहा कि वहां पर दर्जनों व्यक्ति मौत की सजा का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने फांसी की सजा की दर को खतरनाक बताया और कहा कि ईरान में फांसी का आंकड़ा इस साल के अंत तक 1,000 से ज्यादा तक पहुंच सकता है।
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