संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र ने शांति सैनिकों के खिलाफ यौन उत्पीड़न एवं दुर्व्यवहार के आरोपों के मामले में भारत और अन्य देशों की ओर से पितृत्व एवं बाल समर्थन दावों के संबंध में किये गए प्रयासों की प्रशंसा की है।
फील्ड सपोर्ट के लिए अंडर सेक्रेटरी अतुल खरे ने महासभा को बताया कि यद्यपि जरूरी नहीं कि भारत, बेनिन, इक्वाडोर और उरूग्वे पितृत्व आरोपों का सामना कर रहे हों लेकिन इसके बावजूद इन देशों ने राष्ट्रीय पितृत्व केंद्र बिंदु तय करने के लिए कदम उठाये हैं। उन्होंने साथ ही उम्मीद जताई कि अन्य देश भी इस उदाहारण का पालन करेंगे। चुनौतियों और संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों द्वारा उत्पीड़न एवं दुर्व्यवहार रोकने के लिए हासिल प्रगति की पृष्ठभूमि में खरे ने बीते शुक्रवार को कहा कि प्राथमिकता संगठन के लिए होनी चाहिए कि वह पीड़ितों को सहयोग एवं सहायता मुहैया कराए। उन्होंने कहा कि 2015 में संयुक्त राष्ट्र ने शांति सैनिकों के खिलाफ पितृत्व एवं बाल समर्थन दावों में सहायता में प्रगति हासिल की थी।
उन्होंने कहा, 'हमने इस संबंध में सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं को उभरते देखा है। हाल में चार देशों (जरूरी नहीं कि वे पितृत्व आरोपों का सामना कर रहे हो) बेनिन, इक्वाडोर, भारत और उरूग्वे ने सचिवालय को इस कार्य के लिए केंद्र बिंदु के निर्धारण की सूचना दी थी और हमें अन्य सदस्य देशों से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया का इंतजार है।' गत मार्च में जारी एक नई रिपोर्ट में कोई भी भारतीय शांति सैनिक किसी तरह की गलत चीज में दोषी नहीं पाया गया। इस रिपोर्ट में पहली बार उन शांति सैनिकों की पहचान की गई जो नागरिकों के खिलाफ यौन उत्पीड़न में लिप्त हैं।
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