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अमेरिका, भारत, जापान सामुद्रिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए साथ काम करेंगे

न्यूयार्क: भारत-प्रशांत क्षेत्र में भारत, जापान और अमेरिका के समान हितों पर प्रकाश डालते हुए तीनों देशों ने दक्षिण चीन सागर समेत क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून, विवादों के शांतिपूर्ण हल और नौपरिवहन की आजादी के

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अमेरिका, भारत, जापान साथ काम करेंगे

न्यूयार्क: भारत-प्रशांत क्षेत्र में भारत, जापान और अमेरिका के समान हितों पर प्रकाश डालते हुए तीनों देशों ने दक्षिण चीन सागर समेत क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून, विवादों के शांतिपूर्ण हल और नौपरिवहन की आजादी के महत्व को रेखांकित किया। भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, जापान के विदेश मंत्री फुमियो किशहिदा और अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी यहां पहले भारत-अमेरिका-जापान त्रिपक्षीय मंत्रिस्तरीय वार्ता में शामिल हुए जिसमें उन्होंने बेहतर सहयोग के माध्यम से समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के लिए साथ काम करने पर सहमति जताई। कल बैठक के बाद जारी की गयी विग्यप्ति में तीनों मंत्रियों ने भारत-प्रशांत क्षेत्र में अपने अपने देश के हितों की बढ़ती समानता को रेखांकित किया। विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने दक्षिण चीन सागर समेत क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून एवं विवादों के शांतिपूर्ण हल, नौपरिवहन एवं समुद्र के उपर उड़ान की आजादी और बेरोकटोक वैध वाणिज्य के महत्व को रेखांकित किया।

सुषमा ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि एशिया प्रशांत और हिन्द महासागर क्षेत्र भारत की खुद के सुरक्षा एवं आर्थिक हितों के लिहाज से सामरिक महत्व का है। क्षेत्र में संचार के समुद्री मार्ग भारत के व्यापार एवं वाणिज्यिक बाह्यता की जीवनरेखा हैं।  सुषमा ने कहा कि भारत की एक्ट ईस्ट नीति के तहत देश ने क्षेत्र में आर्थिक विकास के केंद्रों के साथ मजबूत संपर्क बनाने पर ध्यान दिया है और उनके साथ राजनीतिक एवं सुरक्षा संबंध मजबूत किए हैं जिनमें आसियान के सदस्य देश भी शामिल हैं। भारत के जल्द ही एपेक की सदस्यता हासिल करने की इच्छा जाहिर करते हुए उन्होंने इसके लिये भारत अमेरिका और जापान के साथ काम करने की इच्छा जताई। सुषमा ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 70वें सत्र से इतर हुए बैठक में कहा, हम क्षेत्र में पारदर्शिता, समावेशन और कानून के शासन को मजबूत करने के प्रयास और अपने पारस्परिक लाभ एवं क्षेत्र के वृहद हित के लिए भी हम साथ जो कर सकते हैं, उस लिहाज से भारत-अमेरिका-जापान की पहली बैठक को शांति, समृद्धि और स्थिरता के लिए एक त्रिपक्षीय भागीदारी के तौर पर देखते हैं।

विश्व की एक तिहाई आबादी और आर्थिक उत्पादन शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए तीनों देशों ने शांति, लोकतंत्र, समृद्धि और नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए अपने साझा समर्थन को रेखांकित किया। सुषमा ने कहा कि बैठक से तीनों देशों के सामरिक, राजनीति, आर्थिक एवं सुरक्षा हितों के बढ़ती समानता को रेखांकित करता है। केरी ने कहा कि बैठक महत्वपूर्ण है क्योंकि पूर्वी एशिया विशाल आर्थिक विकास का क्षेत्र और साथ ही सुरक्षा के कुछ मुद्दों के लिए चुनौती की भी एक जगह है। उन्होंने कहा, यह भारत की पूर्व एशिया नीति और साथ ही प्रधानमंत्री शिंजो अबे के नेतृत्व में दक्षिण एवं दक्षिणपूर्वी एशिया के साथ जापान के बेहद सक्रिय जुड़ाव के तहत भारत-प्रशांत क्षेत्र में हमारे हितों को रेखांकित करने में हमारे सक्षम होने का एक महत्वपूर्ण क्षण है। वहीं किशीदा ने कहा कि भारत, अमेरिका और जापान के बीच करीबी सहयोग ना केवल तीनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए बल्कि पूरे भारत-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता एवं समृद्धि के लिए भी सही मायने में महत्वपूर्ण होंगे।

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