वाशिंगटन: अमेरिका में बढ़ती विविधता को ध्यान में रखते हुए व्हाइट हाउस ने बदमाशी के खिलाफ अपना वार्षिक अभियान दक्षिण एशिया की तीन भाषाओं- हिंदी, उर्दू और पंजाबी में शुरू किया है। धौंसपट्टी जमाने को अमेरिका के स्कूलों में एक बड़ी समस्या के रूप में देखा जाता है। हालिया आंकड़े दिखाते हैं कि पांच छात्रों में से एक छात्र स्कूल में पढ़ाई के दौरान बदमाशी का सामना किए जाने की शिकायत दर्ज कराता है और धौंस जमाए जाने की घटना हर सात मिनट में एक बार होती है। व्हाइट हाउस के अनुसार, न्यू यॉर्क सिटी के पब्लिक स्कूलों में पढ़ने वाले एशियाई-अमेरिकी छात्रों में से आधे छात्र ऐसे हैं, जिन्होंने भेदभाव के आधार पर होने वाली प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई है।
व्हाइट हाउस ने राष्ट्रीय बदमाशी रोकथाम माह के दौरान बदमाशी के खिलाफ चलाए जाने वाले अपने अभियान को कोरियाई, वियतनामी और चीनी भाषा के साथ-साथ हिंदी, पंजाबी और उर्दू में लेकर आने की घोषणा की थी। सिख कोएलिशन और कोएलिशन ऑफ एशियन पैसिफिक्स इन एंटरटेनमेंट के साथ शुरू की गई व्हाइट हाउस की पहल इनिशिएटिव ऑन एशियन अमेरिकन्स एंड पैसिफिक आइलैंडर्स पहल के तहत कल बदमाशी के बारे में जागरूकता जगाने के लिए एक्ट टू चेंज नामक अभियान शुरू किया गया। इसका उद्देश्य एशियाई अमेरिकी एवं प्रशांत महाद्वीपीय (AAPI) समुदाय समेत विभिन्न समुदायों में बदमाशी के बारे में जागरूकता फैलाना है।
इस अभियान को मीडिया मंचों, राष्ट्रीय गैरलाभकारी संगठनों समेत विभिन्न समर्थकों के संघ का समर्थन प्राप्त है। एक्ट टू चेंज का उद्देश्य एएपीआई के युवाओं, शिक्षकों और समुदायों को बदमाशी के बारे में जानकारी देना और इससे निपटने और इसे रोकने के लिए जरूरी चीजों से लैस करना है। विभिन्न मंचों से एक्ट टू चेंज को प्रोत्साहन देने के अलावा हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन स्कूलों में हिंदू विरोधी बदमाशी और भेदभाव से जुड़े सर्वेक्षण आंकड़ों को प्रकाशित करेगा। सिख कोएलिशन के कानून एवं नीति निदेशक अर्जुन सिंह ने कहा, सिख बच्चों पर बदमाशी दिखाने की घटनाएं एक महामारी के समान है।
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