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ट्रंप के सलाहकार नवारो का एक और जला-भुना बयान, भारत-चीन-रूस के रिश्ते पर बोल दी बड़ी बात

डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो ने BRICS देशों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह गठबंधन ज्यादा नहीं टिकेगा क्योंकि सदस्य देश एक-दूसरे से नफरत करते हैं। भारत को उन्होंने रूस से तेल खरीदने, ऊंचे टैरिफ और चीन के साथ रिश्तों को लेकर चेतावनी दी और इसे अमेरिका के हितों के खिलाफ बताया।

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Image Source : AP डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो।

न्यूयॉर्क/वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने एक बार फिर जहर उगलते हुए BRICS देशों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि BRICS गठबंधन ज्यादा दिन नहीं टिकेगा क्योंकि इसके सदस्य देश एक-दूसरे से 'नफरत' करते हैं और उनके व्यापारिक तरीके 'वैम्पायर' जैसे हैं, जो अमेरिका का 'खून चूस' रहे हैं। BRICS गठबंधन में शुरू में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। साल 2024 में इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जुड़े, और 2025 में इंडोनेशिया भी इसका हिस्सा बना।

'वैम्पायर की तरह हमारा खून चूसते हैं'

नवारो ने सोमवार को 'रियल अमेरिका वॉयस' शो में एक इंटरव्यू के दौरान कहा, 'मुझे नहीं लगता कि BRICS गठबंधन ज्यादा दिन चल पाएगा। ये सारे देश एक-दूसरे से नफरत करते हैं और इतिहास में एक-दूसरे के खिलाफ लड़े भी हैं।' उन्होंने BRICS देशों के व्यापारिक रवैये की आलोचना करते हुए कहा, 'इन देशों की अर्थव्यवस्था अमेरिका को सामान बेचे बिना नहीं चल सकती। लेकिन जब ये हमें सामान बेचते हैं, तो उनके अनुचित व्यापारिक तरीके वैम्पायर की तरह हमारा खून चूसते हैं।' नवारो ने भारत पर खास तौर से निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'भारत और चीन के बीच दशकों से तनाव है। मुझे याद आया, ये तो चीन ही था जिसने पाकिस्तान को परमाणु बम दिया। अब हिंद महासागर में चीनी झंडों वाले जहाज घूम रहे हैं।'

भारत के उच्च टैरिफ को बनाया निशाना

नवारो ने भारत के रूस से तेल खरीदने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि रूस के यूक्रेन पर हमला करने से पहले भारत रूस से 'नाममात्र' तेल खरीदता था। लेकिन अब भारत रूसी तेल का 'लालच में' आयात कर रहा है और रूसी रिफाइनर भारत में 'मुनाफाखोरी' कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिकी टैक्सपेयर्स को यूक्रेन युद्ध के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। नवारो ने भारत के उच्च टैरिफ को भी निशाना बनाया। उन्होंने कहा, 'भारत के टैरिफ दुनिया के किसी भी बड़े देश से ज्यादा हैं। इसे हमें ठीक करना होगा।' उन्होंने भारत को चेतावनी दी कि उसे अमेरिका के साथ व्यापारिक बातचीत में सहयोग करना होगा, वरना 'रूस और चीन के साथ जाने' का अंजाम अच्छा नहीं होगा।

रूस और चीन के रिश्तों पर कसा तंज

नवारो ने रूस और चीन के रिश्तों पर भी तंज कसा। उन्होंने दावा किया कि चीन रूस के व्लादिवोस्तोक बंदरगाह और साइबेरिया पर नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा, 'चीन साइबेरिया को 'अवैध आप्रवासन' के जरिए कब्जा रहा है। पुतिन को इसके लिए शुभकामनाएं।' ब्राजील के बारे में नवारो ने कहा कि वहां की अर्थव्यवस्था राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की 'समाजवादी नीतियों' की वजह से 'बर्बाद' हो रही है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो का जिक्र करते हुए कहा कि ब्राजील की सरकार ने 'असली नेता' को कैद कर रखा है। बता दें कि बोल्सोनारो 2022 के चुनाव हारने के बाद कथित तौर पर तख्तापलट की साजिश रचने के आरोप में मुकदमे का सामना कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर भारत की आलोचना

नवारो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी भारत पर निशाना साधा। उन्होंने एक पोस्ट में कहा, 'भारत की आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा है, लेकिन वह सिर्फ कुछ लाख X इंफ्लुएंसर्स को इकट्ठा करके सर्वे में हेरफेर कर सकता है? ये तो मजाक है। अमेरिका, देखो कैसे विदेशी हित हमारी सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपने एजेंडे के लिए करते हैं।' नवारो ने दावा किया कि अमेरिका ने यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस और इंडोनेशिया के साथ 'शानदार' व्यापार समझौते किए हैं। उन्होंने कहा कि ये देश अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहे हैं क्योंकि उन्हें एहसास हो गया है कि वे अमेरिका का ज्यादा फायदा उठा रहे थे और उन्हें अमेरिकी बाजार की जरूरत है।

चीन पर बैन के सवाल पर गोलमोल जवाब

चीन, जो रूस के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, पर अतिरिक्त प्रतिबंधों के सवाल पर नवारो ने कहा कि अमेरिका 'सावधानी' बरत रहा है। उन्होंने फिर से भारत से रूस का तेल खरीदना बंद करने की मांग की। उन्होंने कहा, 'भारत को रूसी तेल खरीदना बंद करना होगा। ये शांति की दिशा में एक कदम होगा। शांति का रास्ता नई दिल्ली से होकर गुजरता है। यूरोप को भी रूस का तेल खरीदना बंद करना होगा।' चीन पर 50 फीसदी से ज्यादा टैरिफ की बात करते हुए नवारो ने कहा, 'हम अमेरिकी लोगों को नुकसान पहुंचाए बिना उनकी रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं। ये कूटनीति की कला है, और आपको ट्रंप पर भरोसा करना होगा।' (AP)

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