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डोनाल्ड नहीं अब 'डॉ ट्रंप' कहिए जनाब! साहब ने प्रेग्नेंसी में पेरासिटामोल को बता दिया खतरनाक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेरासिटामोल को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान पेरासिटामोल खाने के सेवन से ऑटिज्म का खतरा बढ़ता है। ट्रंप के इस बयान के बाद हड़कंप मच गया है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप- India TV Hindi
Image Source : AP अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

Paracetamol In Pregnancy: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कब क्या कर दें, कब क्या कह दें, इसके बारे में अंदाजा लगा पाना बेहद मुश्किल हैं। लेकिन, अब ट्रंप डॉक्टर भी बन गए हैं और कुछ ऐसा कहा है जिससे दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। ट्रंप ने ऑटिज्म के लिए संभावित इलाज खोजने के लिए रिसर्च पर जोर देते हुए कहा कि गर्भवती महिलाओं को एसिटामिनोफेन के उपयोग को सीमित करना चाहिए, जिसे आमतौर पर अमेरिका में टाइलेनॉल या अन्य जगहों पर पेरासिटामोल के रूप में ब्रांड किया जाता है। ट्रंप ने कहा कि यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन जल्द ही डॉक्टरों को गर्भावस्था के दौरान टाइलेनॉल की सिफारिश को सीमित करने के लिए नोटिस भेजेगा। इसे तब तक नहीं दिया जाना चाहिए जब तक कि चिकित्सकीय रूप से आवश्यक ना हो, जैसे कि बुखार के इलाज के लिए।

अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने क्या कहा?

अमेरिका के स्वास्थ्य सचिव, रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर के नेतृत्व में कई महीनों तक की गई व्यापक जांच के बाद, डोनाल्ड ट्रंप ने इस तरह का बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि गर्भवती महिलाएं अगर पेरासिटामोल का उपयोग करती हैं तो ऑटिज्म का खतरा बढ़ जाता है। जबकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिकों ने इसका विरोध करते हुए अपनी स्टडी से इसका खंडन किया है।

क्या बोले टाइलेनॉल के निर्माता?

इस बीच टाइलेनॉल (अमेरिका वाला पेरासिटामोल) निर्माता केनव्यू ने कहा, "एसिटामिनोफेन गर्भवती महिलाओं के लिए उनकी पूरी गर्भावस्था के दौरान आवश्यक सबसे सुरक्षित दर्द निवारक विकल्प है। इसके बिना, महिलाओं को खतरनाक विकल्पों का सहारा लेना पड़ता है।"

ऑटिज्म क्या है?

हर इंसान अलग होता है। हर किसी की सोचने, समझने और महसूस करने की शैली जुदा होती है। इन्हीं भिन्नताओं के बीच एक स्थिति है जिसे ऑटिज्म या ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर कहा जाता है। यह एक न्यूरो-डेवलपमेंटल स्थिति है, यानी मस्तिष्क के विकास से जुड़ी हुई अवस्था। इसमें व्यक्ति की सोचने, बोलने, व्यवहार करने और दूसरों से जुड़ने की शैली अलग हो जाती है। ऑटिज्म आमतौर पर बचपन की शुरुआती अवस्था में दिखाई देने लगता है। इसके लक्षण 2–3 साल की उम्र से ही सामने आ सकते हैं। हालांकि, हर बच्चे में लक्षण अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य संकेत इस प्रकार हैं।

  • बोलने या शब्दों को समझने में परेशानी, या बहुत कम बोलना।
  • दूसरों से आंख मिलाने, मुस्कुराने या खेल में शामिल होने में कठिनाई।
  • बार-बार एक ही शब्द बोलना, चीजो को एक क्रम में सजाना, या एक ही काम करते रहना।
  • रोशनी, आवाज, गंध या स्पर्श के प्रति ज्यादा संवेदनशील होना।
  • किसी खास चीज में गहरी और असामान्य रुचि लेना।

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