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नोबेल पुरस्कार के लिए दिखी ट्रंप की तड़प, बोले- 'अगर मुझे नहीं मिला तो...'

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार के लिए उतावले नजर आ रहे हैं। ट्रंप इसे पाने के लिए खुद अपना बयान कर रहे हैं। ट्रंप ने इसे अब अमेरिका की अस्मिता का सवाल बना दिया है।

Donald Trump- India TV Hindi
Image Source : AP Donald Trump

न्यूयॉर्क/वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने सात वैश्विक संघर्षों को खत्म कराने में भूमिका निभाई है, इसके बावजूद अगर नोबेल पुरस्कार उन्हें नहीं दिया जाता है तो यह अमेरिका के लिए ‘बड़े अपमान की बात’ होगी। गाजा संघर्ष को समाप्त कराने की योजना का जिक्र करते हुए ट्रंप ने मंगलवार को क्वांटिको में सैन्य अधिकारियों को अपने संबोधन में कहा, ‘‘मुझे लगता है, हमने इसे सुलझा लिया है। अब, हमास को सहमत होना होगा और अगर वो नहीं मानते, तो उनके लिए बहुत मुश्किल होगा। सभी अरब, मुस्लिम राष्ट्र इससे सहमत हैं। इजरायल सहमत है। यह एक अद्भुत बात है कि सभी साथ आ गए हैं।’’

'कोई ऐसा कभी नहीं कर पाया' 

ट्रंप ने कहा कि अगर सोमवार को घोषित गाजा संघर्ष को समाप्त कराने की उनकी योजना कामयाब हो जाती है तो उन्होंने कुछ ही महीनों में आठ संघर्षों को सुलझा लिया है। ट्रंप ने कहा, ‘‘यह शानदार है, कोई ऐसा कभी नहीं कर पाया। फिर भी, ‘क्या आपको नोबेल पुरस्कार मिलेगा?’ बिल्कुल नहीं। वो इसे किसी ऐसे व्यक्ति को देंगे जिसने कुछ भी नहीं किया। वो इसे ऐसे व्यक्ति को देंगे जिसने डोनाल्ड ट्रंप के विचारों और युद्ध को सुलझाने के लिए क्या किया गया, इस पर कोई किताब लिखी है,  हां, नोबेल पुरस्कार किसी लेखक को मिलेगा। लेकिन देखते हैं क्या होता है।’’ 

'देश के लिए बड़े अपमान की बात होगी'

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘‘यह हमारे देश के लिए बड़े अपमान की बात होगी। मैं आपको बता दूं कि मैं ऐसा नहीं चाहता। मैं चाहता हूं कि यह देश को मिले। यह सम्मान देश को मिलना ही चाहिए क्योंकि ऐसा कुछ पहले कभी नहीं हुआ। इस बारे में सोचिएगा जरूर। मुझे लगता है कि यह (गाजा संघर्ष को समाप्त करने की योजना) सफल होगा। मैं यह बात हल्के में नहीं कह रहा, क्योंकि मैं समझौतों के बारे में किसी से भी ज्यादा जानता हूं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन, आठ समझौते करना वाकई सम्मान की बात है।’’

नोबेल शांति पुरस्कार कैसे मिलता है?

नोबेल शांति पुरस्कार पाना आसान नहीं है, इसके लिए सबसे पहले नामांकन चाहिए। कोई नेता, संगठन या मान्य संस्थान नाम सुझा सकता है। फिर नॉर्वे की नोबेल कमेटी बैठती है और महीनों तक जांच पड़ताल की जाती है। जांच पड़ताल में देखा जाता है कि असल में किसने दुनिया में शांति लाने की कोशिश की है, ना कि किसने बस सोशल मीडिया और बयानों में शांति का राग अलापा है। अक्टूबर में नतीजा घोषित होता है और दिसंबर में इनाम दिया जाता है। (भाषा)

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