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“NATO हमारे काम नहीं आया जब हमें उनकी जरूरत थी...अगर फिर जरूरत पड़ी तब भी वे नहीं होंगे",ग्रीनलैंड याद रखो; ट्रंप ने दी धमकी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो पर एक बार फिर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि नाटो तब हमारे साथ नहीं था, जब हमें उनकी जरूरत थी...वह आगे भी जरूरत पड़ने पर साथ नहीं होंगे।

नाटो महासचिव मार्क रूट (बाएं) और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (दाएं)- India TV Hindi
Image Source : AP नाटो महासचिव मार्क रूट (बाएं) और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (दाएं)

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) को फिर एक बार कड़ी धमकी दी है। उन्होंने बुधवार को कहा, "नाटो हमारे काम नहीं आया जब हमें उनकी जरूरत थी, और अगर हमें फिर से उनकी जरूरत पड़ी तो वे तब भी नहीं होंगे। ग्रीनलैंड को याद रखो- वो बड़ा बर्फ का एक टुकड़ा बुरे तरीके से चलाया जा रहा!!!" ट्रंप की इस धमकी ने नाटो महासचिव को असहज कर दिया। 

नाटो महासचिव के साथ बंद कमरे में ट्रंप ने की बैठक

ट्रंप ने नाटो महासचिव मार्क रूट के साथ बंद कमरे में यह बैठक की थी, जिसके बाद उन्होंने नाटो के प्रति अपनी शिकायत और कड़ी नाराजगी दोहराई। इस बैठक से पहले जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया और गैस की कीमतें आसमान छूने लगीं तो ट्रंप ने संकेत दिया था कि अगर नाटो के सदस्य देशों ने उनके आह्वान को नजरअंदाज किया तो अमेरिका नाटो से बाहर निकलने पर विचार कर सकता है। ट्रंप ने इस ताजा बैठक के बाद सोशल मीडिया पर कैपिटल लेटर्स में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा: “नाटो हमारे काम नहीं आया जब हमें उनकी जरूरत थी, और अगर हमें फिर से उनकी जरूरत पड़ी तो वो तब भी नहीं होंगे।” व्हाइट हाउस ने तुरंत इस पर कोई और अपडेट नहीं दिया।

ट्रंप ने सीजफायर से पहले ईरान को दी थी सभ्यता मिटाने की धमकी

राष्ट्रपति ट्रंप और मार्क रूट के बीच यह बैठक मंगलवार देर रात अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर (युद्धविराम) पर सहमति बनने के बाद हुई, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का भी प्रावधान है। यह नया सीजफायर ट्रंप के उस बयान के बाद हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो वह ईरान के पावर प्लांट और पुलों पर हमला करेंगे। साथ ही धमकी दी थी कि “आज रात पूरी सभ्यता मिट जाएगी।” इससे पहले बुधवार को व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने स्वीकार किया कि ट्रंप ने नाटो से बाहर निकलने पर चर्चा की थी। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि राष्ट्रपति कुछ घंटों में महासचिव रूट के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।”

नाटो से बाहर निकलने के लिए बाइडेन के कार्यकाल में आया था ये कानून

पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में कांग्रेस ने 2023 में एक कानून पास किया था, जिसमें किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति को नाटो से बाहर निकलने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी कर दी गई है। ट्रंप लंबे समय से नाटो के आलोचक रहे हैं और अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने कहा था कि उनके पास अकेले ही नाटो से बाहर निकलने का अधिकार है। नाटो की स्थापना 1949 में सोवियत संघ के खतरे के खिलाफ यूरोपीय सुरक्षा के लिए की गई थी। नाटो के 32 सदस्य देशों का मुख्य वादा आपसी रक्षा समझौता है, जिसमें एक पर हमला सभी पर हमला माना जाता है। इस समझौते को अब तक केवल एक बार 2001 में 9/11 हमलों के बाद अमेरिका की मदद के लिए सक्रिय किया गया था। इसके बावजूद ट्रंप ने ईरान के साथ अपने युद्ध को लेकर शिकायत की कि नाटो अमेरिका के साथ नहीं खड़ा हुआ। 

क्या अब नाटो से बाहर निकलेगा अमेरिका

ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर नाटो के रुख को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। बता दें कि ग्रीनलैंड नाटो सदस्य डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है। ट्रंप ने इस साल की शुरुआत में ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की मांग की थी, लेकिन बाद में रूट के साथ बातचीत के बाद पीछे हट गए थे। यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप प्रशासन उस कानून को चुनौती देगा या नहीं जो राष्ट्रपति को नाटो से बाहर निकलने से रोकता है। जब यह कानून पास हुआ था, तब इसका समर्थन ट्रंप के वर्तमान विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने किया था, जो उस समय फ्लोरिडा के सीनेटर थे। रूबियो ने बुधवार सुबह व्हाइट हाउस की बैठक से पहले स्टेट डिपार्टमेंट में रूट से अलग से मुलाकात की। स्टेट डिपार्टमेंट के बयान में कहा गया कि रुबियो और रूट ने ईरान युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के अमेरिकी प्रयासों और “नाटो सहयोगियों के साथ बढ़ते समन्वय तथा बोझ साझा करने” पर चर्चा की। 

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