अमेरिका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा का सत्र जारी है। दुनियाभर के देशों के प्रमुख और प्रतिनिधि इस सत्र में हिस्सा ले रहे हैं और अनेक मुद्दों पर अपनी बात रख रहे हैं। इसी क्रम में बुधवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की ने भी संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। इस दौरान जेलेंस्की ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर जमकर हमला बोला। जेलेंस्की ने पुतिन को 'पेशेंट जीरो' तक बता दिया है।जेलेंस्की ने सभी देशों से अपील की कि वे रूस की कमाई को रोके और युद्ध की कोशिशों में बाधा डालकर शांति के लिए रूसी राष्ट्रपति पुतिन पर दबाव डालें।
जेलेंस्की ने पुतिन को क्यों कहा पेशेंट जीरो?
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने UN में पुतिन को पेशेंट जीरो बताया और आरोप लगाया कि पुतिन ने युद्ध को यूक्रेन से बाहर फैलने दिया और दुनिया को और ज्यादा खतरनाक बना दिया है। UN में दिए गए अपने भाषण में जेलेंस्की ने कहा- पुतिन हमेशा किसी ऐसे की तलाश करते रहते हैं जो कि उन्हें और अधिक लोगों को मारने में मदद कर सके। जमीन के हर किलोमीटर के लिए और ज्यादा लोगों की जान ले सके, और ज्यादा इलाका कब्जे में ले सके और किसी दूसरे देश पर हमला कर सके। क्या आप उन्हें (पुतिन को) बिना युद्ध के सोच भी सकते हैं? वह पेशेंट जीरो हैं। वही शख्स जिनसे युद्ध का यह विचार आगे फैलता रहता है। और ये युद्ध जहां भी फैलता है, सिर्फ दर्द, अस्थिरता, नए जोखिम और निश्चित रूप से नए संकट को लेकर आता है। पुतिन को काम करने की जितनी ज्यादा आजादी मिलेगी, दुनिया बाकी सभी लोगों के लिए उतनी ही ज्यादा खतरनाक होती जाएगी।" आपको बता दें कि हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा था कि रूस-यूक्रेन युद्ध में हर महीने 25 हजार लोगों की मौत हो रही है।
'रूस कर रहा 47 देशों के नागरिकों का इस्तेमाल'
जेलेंस्की ने आरोप लगाया है कि रूस यूक्रेन के खिलाफ इस युद्ध में 47 देशों के नागरिकों का इस्तेमाल कर रहा है। जेलेंस्की ने बताया कि यूक्रेन को युद्धबंदियों के तौर पर कई देशों के नागरिक मिलते हैं और ये सिर्फ उत्तर कोरिया के नागरिक नहीं हैं। जेलेंस्की ने कहा- "हमें पता है कि रूस अपनी जंग में 47 देशों के नागरिकों का इस्तेमाल कर रहा है। इस जंग में घाना, नेपाल, ताजिकिस्तान, भारत, यमन, केन्या, जिम्बाब्वे, क्यूबा, बेलारूस, सूडान, दक्षिण अफ्रीका समेत कई अन्य देश शामिल हैं। समय-समय पर हमारे पास कुछ युद्धबंदियों को उनके देश वापस भेजने के लिए निवेदन आते रहते हैं। हमने जंग के मैदान में ऐसे लोगों को भी जान गंवाते हुए देखा है जो कि रूस के नहीं हैं, जो आपके देशों के लोग हैं, 47 देशों के लोग हैं। ये लोग छल-कपट और चालों के जरिए रूस पहुंच गए।" (एपी के इनपुट के साथ)
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