न्यूयॉर्क: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में ईरान की सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि ईरान की मौजूदा सरकार आखिरकार गिर जाएगी और वहां की जनता एक दिन अपने शासकों के खिलाफ खड़ी होगी। नेतन्याहू ने कहा कि ईरान की सरकार का अंत उसके 'झूठ, भ्रष्टाचार और क्रूरता' की वजह से होगा। उन्होंने कहा कि यह 'दुष्ट शासन' एक दिन खत्म हो जाएगा। UNGA में नेतन्याहू के बयान ने अच्छी-खासी हलचल पैदा कर दी है।
‘ईरान में जल्द कुछ अविश्वसनीय होगा’
नेतन्याहू ने अपने भाषण में कहा,
'ईरान में एक दिन, और शायद वह दिन बहुत दूर नहीं है, कुछ अविश्वसनीय होगा। ईरान के लोग अपने शासन के खिलाफ उठ खड़े होंगे। यह सिर्फ समय की बात है कि ईरान में कुछ बड़ा बदलाव होगा और वहां का दमनकारी शासन गिर जाएगा।'
नेतन्याहू ने ईरान की सरकार पर अपने ही लोगों के खिलाफ हिंसा करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने सवाल किया कि जो लोग उनके भाषण का विरोध कर रहे थे या संयुक्त राष्ट्र के हॉल से बाहर चले गए, वे उस समय कहां थे जब, उनके दावे के अनुसार, ईरानी सरकार ने हजारों निहत्थे नागरिकों को मारा और घायल किया।
भाषण के दौरान कई प्रतिनिधि बाहर निकले
नेतन्याहू के भाषण की शुरुआत के दौरान कई देशों के प्रतिनिधि UN महासभा हॉल से बाहर चले गए। इस विरोध का जवाब देते हुए नेतन्याहू ने प्रदर्शनकारियों और भाषण का बहिष्कार करने वालों पर निशाना साधा। उन्होंने उन्हें 'दिखावटी मानवाधिकार समर्थक' बताया और पूछा कि जब ईरान में लोगों पर अत्याचार हो रहे थे, तब वे कहां थे। भाषण के दौरान उन्होंने बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों को 'मोरल काउर्ड्स' यानी 'नैतिक रूप से कायर' भी कहा।
'ट्रंप से बड़ा इजरायल का कोई साझेदार नहीं'
इजरायली प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इजरायल के लिए ट्रंप से बड़ा कोई साझेदार नहीं है। नेतन्याहू ने कहा,
'इन बर्बर ताकतों के खिलाफ लड़ाई में हमारे पास राष्ट्रपति ट्रंप से बड़ा कोई साझेदार नहीं रहा। मैं उनके साहसी नेतृत्व के लिए उन्हें धन्यवाद देता हूं। उन्होंने अमेरिका, इजरायल और पूरी दुनिया के लिए एक बड़े खतरे का साहस के साथ सामना किया।'
उन्होंने आगे कहा कि इजरायल और अमेरिका ने मिलकर सिर्फ अपनी सुरक्षा के लिए ही कार्रवाई नहीं की, बल्कि 'सभ्यता को बचाने' के लिए भी कदम उठाया।
'परमाणु ठिकानों पर हमले को बताया जरूरी'
नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर इजरायल की सैन्य कार्रवाई का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु ठिकानों को तबाह करना बेहद मुश्किल था, लेकिन प्रधानमंत्री के तौर पर उनके लिए यह सबसे आसान फैसलों में से एक था। उन्होंने कहा,
'ईरान के परमाणु ठिकानों को तबाह करना कठिन था। बहुत कठिन था। लेकिन प्रधानमंत्री के तौर पर मेरे लिए यह सबसे आसान फैसलों में से एक था। क्योंकि अगर हमने ऐसा नहीं किया होता, तो हम सभी मारे जाते।'
नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि कई देशों के नेता सार्वजनिक तौर पर इजरायल की कार्रवाई की आलोचना करते हैं, लेकिन निजी तौर पर वे इजरायल की कार्रवाई के लिए धन्यवाद देते हैं। उन्होंने कहा कि इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ कार्रवाई करके उन देशों की भी सुरक्षा की, जिनके प्रतिनिधि उनके भाषण से बाहर चले गए थे। उन्होंने इस स्थिति को 'हैरान करने वाला पाखंड' बताया।
'3 साल से 7 मोर्चों पर लड़ रहा इजरायल'
नेतन्याहू ने पिछले 3 वर्षों में इजरायल के सामने आए सुरक्षा खतरों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इजरायल एक साथ कई मोर्चों पर लड़ रहा है। उन्होंने इसे '7 मोर्चों की लड़ाई' बताया। उन्होंने कहा कि इन मोर्चों में हमास, हिजबुल्लाह, हूती, ईरान, इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया, सीरिया में ईरान समर्थित मिलिशिया और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी सशस्त्र समूह शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी ताकतों का उद्देश्य इजरायल को खत्म करना है। नेतन्याहू ने कहा,
'पिछले 3 वर्षों से हमारे बहादुर सैनिक दिन-रात 7 मोर्चों पर युद्ध लड़ रहे हैं। क्या आप न्यू जर्सी जितने आकार के किसी और देश को जानते हैं, जो 7 मोर्चों पर युद्ध लड़ने में सक्षम हो?'
उन्होंने दावा किया कि इन सभी मोर्चों से इजरायल पर एक साथ दबाव बनाया गया। बता दें कि हाल ही में नेतन्याहू ने ट्रंप का गाजा पीस प्लान ठुकरा दिया था और कहा था कि जब तक वह प्रधानमंत्री हैं, फिलिस्तीनी राज्य नहीं बन सकता। (ANI से इनपुट्स के साथ)
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