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ट्रंप के करीबी ने पद छोड़ने के बाद दिया बड़ा बयान, बोले- 'ईरान परमाणु हथियारों के करीब भी नहीं'

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी रहे जो केंट ने बड़ा बयान दिया है। केंट का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब नहीं था। केंट ने जंग के लिए सीधे तौर पर इजरायल को दोषी ठहराया है।

Joseph Kent- India TV Hindi
Image Source : AP Joseph Kent

वॉशिंगटन: ईरान में जंग का विरोध करते हुए ट्रंप प्रशासन के काउंटर टेररिज्म मामलों के शीर्ष अधिकारी जों केंट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने के बाद केंट ने अमेरिका को जंग में धकेलने के लिए इजरायल को दोषी ठहराया है। केंट ने दावा किया कि तेहरान परमाणु हथियार बनाने के कहीं भी करीब नहीं था। केंट के बयान से इतर ट्रंप की प्रेस सेक्रेटरी, कैरोलीन लेविट ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति पूरी तरह से देश के हितों को ध्यान में रखकर काम करते हैं और वो किसी दूसरे देश के नियंत्रण में नहीं हैं।

जों केंट ने क्या कहा?

जों केंट ने पॉडकास्टर टकर कार्लसन के साथ एक विस्तृत इंटरव्यू में हिस्सा लिया। इस इंटरव्यू में उन्होंने अपनी इस हाई-प्रोफाइल नौकरी को छोड़ने के अपने फैसले पर चर्चा की और जंग के बारे में अपने कई विचार साझा किए। केंट ने टकर कार्लसन से कहा, "इस कार्रवाई को करने का फैसला इजरायल ने लिया था और हम जानते थे कि इससे घटनाओं की एक पूरी श्रृंखला शुरू हो जाएगी, जिसका मतलब था कि ईरानी इसका बदला लेंगे।" उन्होंने दावा किया कि इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को बढ़ावा मिला था कि वो जंग शुरू कर सकते हैं और अमेरिका को बस प्रतिक्रिया देनी होगी।

ईरान बना रहा था परमाणु हथियार?

ट्रंप और उनके प्रशासन के कई शीर्ष अधिकारियों ने दावा किया है कि 28 फरवरी को ईरान पर हमला करना इसलिए जरूरी था क्योंकि तेहरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक आने वाले खतरे का संकेत दे रहा था। ट्रंप ने तो दावा करते हुए यहां तक कहा था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने से सिर्फ 2 हफ्ते दूर था।

अमेरिका के पास नहीं थी खुफिया जानकारी

ट्रंप के पूर्व आतंकवाद-रोधी प्रमुख ने कहा कि 2004 से ही ईरान के इस्लामी शासन में एक फतवा या आदेश लागू है, जो उन्हें परमाणु हथियार बनाने से रोकता है। केंट ने कहा, "हमारे पास ऐसी कोई खुफिया जानकारी नहीं थी जिससे यह संकेत मिलता कि उस फतवे का उल्लंघन किया जा रहा है।" 

'अयातुल्ला की मौत से ईरान को ही फायदा हुआ'

केंट के अनुसार, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या से अमेरिका को कोई फायदा नहीं हुआ, बल्कि इससे उनके कट्टर समर्थकों को और बढ़ावा ही मिला। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि अयातुल्ला को मरने का कोई डर था। ऐसा इसलिए नहीं कि वह कोई पागल या सनकी इंसान थे, बल्कि इसलिए कि वह जानते थे कि अगर उन्हें मार भी दिया गया, तो भी उनका शासन बचा रहेगा।" 

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