न्यूयॉर्क: अमेरिका के मिशिगन राज्य में डेमोक्रेटिक पार्टी की सीनेट प्राइमरी में प्रोग्रेसिव नेता अब्दुल एल-सैयद ने बड़ी जीत हासिल की है। उन्होंने पार्टी के बड़े नेताओं द्वारा समर्थित उम्मीदवार और प्रतिनिधि हेली स्टीवंस को कड़े मुकाबले में हराकर डेमोक्रेटिक पार्टी का सीनेट उम्मीदवार बनने का अधिकार हासिल किया। इस जीत को डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव गुट के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। पूर्व सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी रह चुके अब्दुल एल-सैयद का यह चुनाव राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना रहा। इस मुकाबले में बाहरी संगठनों ने भी भारी खर्च किया।
'रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ी खुशखबरी है'
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकन इजरायल पब्लिक अफेयर्स कमेटी यानी कि AIPAC ने हेली स्टीवंस के समर्थन में रिकॉर्ड 3.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर या करीब 304 करोड़ रुपये खर्च किए। इस चुनाव नतीजे पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यह नतीजा रिपब्लिकन पार्टी के लिए 'बहुत अच्छी खबर' है। ट्रंप ने अपने पोस्ट में अब्दुल एल-सैयद को 'कम्युनिस्ट लूजर' बताया और उन पर यहूदियों और इजरायल के प्रति नफरत का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा,
'रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ी खुशखबरी है। एल-सैयद, जो एक कम्युनिस्ट लूजर है तथा यहूदियों और इजरायल से नफरत करता है, अपनी पार्टी की प्राइमरी जीतने जा रहा है। हमेशा की तरह इस बार भी चुनावी सर्वे गलत साबित हुए। उनकी प्रतिद्वंद्वी से इतनी कड़ी टक्कर की उम्मीद नहीं थी। अब डेमोक्रेट्स की 'पागलपन से भरी नीतियां' और आगे बढ़ेंगी।'
एल-सैयद पर यहूदी विरोधी होने के हैं आरोप
हालांकि शुरुआती चुनावी सर्वे में एल-सैयद को बड़ी बढ़त दिखाई गई थी, लेकिन वास्तविक मुकाबला काफी करीबी रहा। इसके बावजूद उनकी जीत को प्रोग्रेसिव आंदोलन की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है। मिशिगन की इस प्राइमरी के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं, इमिग्रेशन और इजरायल जैसे मुद्दों पर दोनों उम्मीदवारों के बीच तीखी बहस हुई। हेली स्टीवंस और उनके समर्थकों ने एल-सैयद पर यहूदी विरोधी और महिलाओं के प्रति भेदभाव से जुड़े आरोप लगाए। वहीं, एल-सैयद के समर्थकों ने स्टीवंस के इलेक्शन कैंपेन पर इस्लामोफोबिया फैलाने का आरोप लगाया।
डेमोक्रेटिक पार्टी के कई बड़े नेताओं को झटका
एल-सैयद की जीत को डेमोक्रेटिक पार्टी के कई बड़े नेताओं के लिए भी झटका माना जा रहा है। सीनेट में डेमोक्रेटिक अल्पमत नेता चक शूमर और मिशिगन की गवर्नर ग्रेचेन व्हिटमर ने हेली स्टीवंस का समर्थन किया था, लेकिन उनकी उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। अब आम चुनाव में अब्दुल एल-सैयद का मुकाबला रिपब्लिकन पार्टी के पूर्व प्रतिनिधि माइक रोजर्स से होने की संभावना है। मिशिगन को अमेरिका का अहम 'बैटलग्राउंड' राज्य माना जाता है और माना जा रहा है कि इस सीट का परिणाम अमेरिकी सीनेट में शक्ति संतुलन तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सांसद श्री थानेदार भी हार गए अपना चुनाव
इस बीच, मिशिगन में एक और बड़ा उलटफेर देखने को मिला। 13वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट की डेमोक्रेटिक प्राइमरी में मौजूदा सांसद श्री थानेदार को डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट उम्मीदवार डोनावन मैककिनी ने हरा दिया। इसके साथ ही थानेदार इस चुनाव में प्रोग्रेसिव उम्मीदवार से हारने वाले एक और मौजूदा सांसद बन गए। विश्लेषकों का मानना है कि अब्दुल एल-सैयद की जीत के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर उसकी वैचारिक दिशा को लेकर बहस और तेज हो सकती है। माना जा रहा है कि इसका असर अमेरिका में होने वाले भविष्य के चुनावों, खासकर 2028 के राष्ट्रपति चुनाव, की रणनीति पर भी पड़ सकता है। (ANI से इनपुट्स के साथ)
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