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CJP प्रवक्ता का दावा, 'सरकार ने मिलने के लिए बुलाया'; अभिजीत दीपके ने तोड़ी भूख हड़ताल

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने दावा किया है कि सरकार ने उन्हें मुलाकात के लिए बुलाया है। वहीं दूसरी तरफ अभिजीत दीपके ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है।

जंतर मंतर पर हुई झड़प।- India TV Hindi
Image Source : PTI जंतर मंतर पर हुई झड़प।

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां चल रहे प्रदर्शन में शामिल कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता ने दावा किया है कि सरकार ने उन्हें बैठक के लिए बुलाया है। प्रवक्ता ने यह भी दावा कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से उनके प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात हो सकती है। सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने एक्स पर एक पोस्ट में इसकी जानकारी दी। बता दें कि बीते कई दिनों के प्रदर्शन के बाद आज कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक संसद की ओर मार्च निकल रहे थे। हालांकि इस दौरान आरएएफ और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी देखने को मिली।

जेपी नड्डा से हो सकती है मुलाकात

दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट कर जेपी नड्डा से मुलाकात की जानकारी दी। सौरभ दास ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, "सुबह के 11:52 बजे हैं। आशुतोष रांका और मैं, 'कॉकरोच जनता पार्टी' की ओर से, जे.पी. नड्डा से मिलने जा रहे हैं। सरकार ने सुबह बातचीत के लिए संपर्क किया था। हमारी मांगें साफ हैं। बड़ी संख्या में युवा इकट्ठा हुए हैं।" हालांकि देखने वाली बात होगी कि अगर सरकार और सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल के बीच मुलाकात होती है तो किन-किन मांगों को पूरा किया जाता है।

अभिजीत दीपके ने खत्म किया अनशन

वहीं दूसरी तरफ कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने अपना अनशन भी खत्म कर दिया है। इससे पहले सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने के लिए कुछ शर्तें रखी थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी चिट्ठी पोस्ट कर उन शर्तों के बारे में बताया। उन्होंने चिट्ठी में 3 शर्तें लिखीं। वांगचुक की पहली शर्त, सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल की नाकामियों, पेपर लीक वगैरह की ज़िम्मेदारी ले। दूसरी शर्त, सोनम वांगचुक और CJP की लीडरशिप को संसद तक पहुंचने दिया जाए। तीसरी शर्त, वहां अलग-अलग पार्टियों के सांसद और नेता भरोसा दिलाएं कि वे अब संसद में इस मुद्दे को उठाएंगे और अगर उनकी सेहत या दूसरी वजहों से ऐसा करना मुमकिन ना हो, तो अलग-अलग पार्टियों के सांसद और नेता अस्पताल में आकर चिट्ठी में बताई गई बातों का भरोसा दिलाएं।

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