7.36 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में चौंकाने वाला खुलासा, बैंक मैनेजर समेत 6 गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने 7.36 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले का चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस मामले में पुलिस ने बैंक मैनेजर समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने जांच के दौरान 37 संदिग्ध म्यूल बैंक खातों का भी पता चला है।

दिल्ली पुलिस के उत्तर-पश्चिम जिले की साइबर सेल ने 7.36 करोड़ की साइबर ठगी से जुड़े कथित संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए बैंक मैनेजर समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में कैथोलिक सीरियन बैंक की सरस्वती विहार और त्रि नगर शाखाओं में संचालित 37 संदिग्ध म्यूल बैंक खातों का खुलासा हुआ है। इन खातों में देशभर में दर्ज साइबर अपराध की 99 शिकायतों से जुड़ी करीब 7.36 करोड़ रुपये की रकम जमा होने का पता चला है।
आरोपियों के पास से क्या-क्या मिला?
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में म्यूल बैंक खातों का कथित संचालक मयंक कपूर, सरस्वती विहार शाखा का प्रबंधक शोभित अग्रवाल और बैंक खातों को खोलने की प्रक्रिया से जुड़े चार अन्य कर्मचारी शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 63 आधार कार्ड, 60 पैन कार्ड, 55 पासपोर्ट साइज फोटो, 11 सिम कार्ड, सात मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, सात चेक बुक, सात डेबिट कार्ड, 60 हजार रुपये नकद और करीब 150 ग्राम सोने के आभूषण बरामद किए हैं।
जांच में संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा
पुलिस के अनुसार, म्यूल बैंक खातों से जुड़े आंकड़ों की जांच के दौरान CSB बैंक की त्रि नगर शाखा में संदिग्ध गतिविधियों का पता चला। एक बैंक खाते की जांच में सामने आया कि रिकॉर्ड में खाताधारक के रूप में दर्ज राहुल ने न तो बैंक शाखा में जाकर खाता खुलवाया था और न ही खाता खोलने के लिए आवेदन किया था। इसी तरह दो अन्य संदिग्ध खातों से जुड़े पतों का भी सत्यापन नहीं हो सका। जांच में तीनों खाते देशभर में दर्ज साइबर अपराध की शिकायतों से जुड़े पाए गए। जांच आगे बढ़ने पर त्रि नगर शाखा में 17 अन्य संदिग्ध खातों का भी पता चला। पुलिस के मुताबिक, इन खातों के पते फर्जी पाए गए और खाताधारकों की वास्तविक मौजूदगी में उनकी तस्वीरें तथा केवाईसी दस्तावेज हासिल किए जाने के प्रमाण नहीं मिले।
म्यूल बैंक खातों का संचालन करने वाले की पहचान
पुलिस की जांच में मयंक कपूर उर्फ रिंकू की पहचान कथित तौर पर म्यूल बैंक खातों का संचालन करने वाले व्यक्ति के रूप में हुई। उसे बाबा हरिदास नगर इलाके से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में सामने आया कि मयंक कथित तौर पर दिहाड़ी मजदूरों और अन्य लोगों को लोन दिलाने का झांसा देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो हासिल करता था। पुलिस के अनुसार, इन दस्तावेजों का इस्तेमाल लोगों की जानकारी और वास्तविक उपस्थिति के बिना बैंक खाते खुलवाने के लिए किया जाता था। आरोपी कथित तौर पर इन्हीं लोगों के नाम पर म्यूल सिम कार्ड की व्यवस्था भी करता था।
म्यूल बैंक खाते क्या होते हैं?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि म्यूल बैंक खाते ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी या अन्य अवैध गतिविधियों से प्राप्त धनराशि को हासिल करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। कई मामलों में खाताधारकों को यह जानकारी नहीं होती कि उनके नाम पर खोले गए खाते का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया जा रहा है। आपको बता दें कि इससे पहले दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 5 राज्यों में 1.53 करोड़ की साइबर ठगी रोक दी थी।
बैंक कर्मचारियों ने की मदद
पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, जांच में सामने आया कि मयंक कपूर ने सरस्वती विहार शाखा के मैनेजर शोभित अग्रवाल से संपर्क किया था। आरोप है कि बैंक कर्मचारियों की मदद से वास्तविक खाताधारकों की मौजूदगी के बिना खाते खोले गए और दस्तावेजों पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि शोभित अग्रवाल ने मयंक का परिचय CSB बैंक की त्रि नगर शाखा के प्रबंधक सुशांत कुमार से कराया था।
बैंक के कर्मचारियों को पकड़ा गया
पुलिस का आरोप है कि दोनों शाखाओं में बैंक कर्मचारियों की मदद से सरस्वती विहार में करीब 17 और त्रि नगर में करीब 20 म्यूल खाते खोले गए। पुलिस के अनुसार बैंक की सेल्स टीम से जुड़े मनोज, अंकुर, फातमा और पंकज खाते खोलने की प्रक्रिया पूरी करते थे, जबकि शाखा प्रबंधक सुशांत कुमार और शोभित अग्रवाल उन्हें मंजूरी देते थे। जांच में इन कर्मचारियों और अधिकारियों की कथित भूमिका सामने आने के बाद शोभित अग्रवाल, मनोज, अंकुर, फातमा और पंकज को 18 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया गया।
ठगी के पैसों का क्या किया जाता था?
पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी से प्राप्त रकम को बैंक खातों के माध्यम से हासिल करने के बाद उसे आगे ट्रांसफर किया जाता था। जांच में आरोप है कि इस रकम का एक हिस्सा बैंक अधिकारी शोभित अग्रवाल को दिया जाता था, जबकि शेष रकम को मयंक कपूर ट्रस्ट वॉलेट के जरिए USDT में बदलता था। इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मयंक कपूर (35), अंकुर कुमार (31), मनोज (30), पंकज पांडेय (28), फातमा (25) और शोभित अग्रवाल (38) के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि मामले में अब तक सामने आए बैंक खातों और साइबर अपराध की शिकायतों के बीच संबंधों की जांच की जा रही है।
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