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दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 5 राज्यों में 1.53 करोड़ की साइबर ठगी रोकी; ऐसे मिली कामयाबी

 Reported By: Sanjay Sah,  Written By: Vinay Trivedi
 Published : Oct 18, 2026 05:13 pm IST,  Updated : Oct 18, 2026 05:16 pm IST

दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने वक्त पर एक्शन लेकर 5 राज्यों में साइबर ठगी के शिकार लोगों को बचा लिया। इस कार्रवाई में करीब 1 करोड़ 53 लाख रुपये की संभावित ठगी रोक दी गई।

Cyber Fraud Prevention- India TV Hindi
साइबर ठगी मामलों में दिल्ली पुलिस का एक्शन। Image Source : PEXELS (प्रतीकात्मक फोटो)

दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने समय रहते कार्रवाई करते हुए 5 राज्यों में साइबर ठगी के शिकार लोगों को करीब 1 करोड़ 53 लाख रुपये की संभावित ठगी से बचाया है। इनमें 4 मामले बुजुर्गों को डिजिटल अरेस्ट कर डराने-धमकाने से जुड़े हैं, जबकि एक मामला निवेश के नाम पर ठगी का है। पुलिस की प्रोएक्टिव विक्टिम आइडेंटिफिकेशन एंड प्रोटेक्शन टीम ने संदिग्ध बैंक खातों में पैसों के लेन-देन की जांच के दौरान पीड़ितों की पहचान की। टीम ने दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में लोगों से संपर्क कर उन्हें ठगों के जाल से बाहर निकाला।

14 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रहा 77 साल का बुजुर्ग

दिल्ली के नजफगढ़ में रहने वाले 77 वर्षीय रिटायर्ड कर्मचारी को ठगों ने 17 सितंबर से डिजिटल अरेस्ट कर रखा था। ठगों ने उन्हें पुलिस अधिकारी बनकर वीडियो कॉल की और लगातार डराते रहे। बुजुर्ग से पहले ही 25 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए थे। ठग अब उनसे 3 लाख रुपये और मांग रहे थे। इसके अलावा, सोना-चांदी गिरवी रखने का दबाव बना रहे थे। दिल्ली पुलिस की टीम ने उन्हें समझाकर ठगी से बचाया और करीब 3.48 लाख रुपये का अतिरिक्त नुकसान होने से रोक दिया।

राजस्थान में बुजुर्ग दंपति का घर बचाया

राजस्थान में 80 वर्षीय कपड़ा कारोबारी और उनकी पत्नी को ठगों ने आधार कार्ड के दुरुपयोग का डर दिखाकर डिजिटल अरेस्ट कर रखा था। उनसे 18 लाख रुपये ठगे जा चुके थे। ठग अब 10 लाख रुपये और मांग रहे थे। साथ ही, मकान गिरवी रखने का दबाव बना रहे थे। दिल्ली पुलिस की टीम ने उनसे संपर्क कर साइबर हेल्पलाइन के जरिए शिकायत दर्ज कराने में मदद की और 10 लाख रुपये की अतिरिक्त ठगी रोक दी।

यूपी में रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी और नर्स को बचाया

उत्तर प्रदेश में रहने वाले एक रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी और उनकी पत्नी, जो स्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड नर्स हैं, को ठगों ने जम्मू-कश्मीर में हुए विस्फोट से जुड़े मामले में फंसाने की धमकी दी थी। ठग उनसे करीब 52 लाख रुपये पहले ही ले चुके थे। अब वे 10 लाख रुपये की एफडी तुड़वाकर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बना रहे थे। पुलिस टीम की समय पर मदद से दंपती ने पैसे ट्रांसफर नहीं किए और 10 लाख रुपये का संभावित नुकसान टल गया।

महाराष्ट्र में 55 लाख रुपये की बचत

महाराष्ट्र में 65 वर्षीय अस्पताल कर्मचारी को आधार कार्ड का बम विस्फोट और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले से संबंध बताकर डराया गया था। ठग उनसे करीब 85 लाख रुपये ले चुके थे। अब वे उनकी बेटी के नाम की एफडी से 30 लाख और दामाद के नाम की एफडी से 25 लाख रुपये ट्रांसफर कराने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस की काउंसलिंग और समय पर हस्तक्षेप से परिवार की 55 लाख रुपये की बचत सुरक्षित रही।

गुजरात में निवेश के नाम पर ठगी की कोशिश

गुजरात के एक 50 वर्षीय कारोबारी ने निवेश के नाम पर 25 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे। पुलिस टीम ने उनसे संपर्क किया और लगातार फॉलोअप किया। बाद में कारोबारी को ठगी का एहसास हुआ। वह करीब एक करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बना रहे थे। पुलिस की सतर्कता से उन्होंने आगे पैसे ट्रांसफर नहीं किए और करीब 75 लाख रुपये का संभावित नुकसान बच गया।

पुलिस की लोगों से अपील

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। पुलिस, सीबीआई, एनआईए, ट्राई या आरबीआई का कोई अधिकारी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करता और न ही पैसे की जांच या सुरक्षा के नाम पर रकम मांगता है। साइबर ठगों का साथ देने वालों के खिलाफ राजस्थान पुलिस एक्शन मोड में नजर आई। पुलिस ने 10 हजार से ज्यादा संदिग्धों को नोटिस थमाया।

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