द्वारका जिला पुलिस की स्पेशल स्टाफ ने एक बड़े मल्टी-स्टेट साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क से देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज 89 साइबर ठगी की शिकायतें जुड़ी मिली हैं। इन मामलों में करीब ₹83.23 करोड़ की रकम शामिल है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 109 चेकबुक, 12 मोबाइल फोन समेत बैंक खातों और फर्जी कंपनियों से जुड़े कई दस्तावेज बरामद किए हैं।
संदिग्ध खाते से खुली कड़ी
पुलिस के अनुसार, यह मामला एफआईआर नंबर 101/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2)/61(2)/3(5) और थाना द्वारका नॉर्थ में दर्ज किया गया था। साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर उपलब्ध शिकायतों के विश्लेषण के दौरान द्वारका सेक्टर-23ए स्थित यस बैंक के एक संदिग्ध खाते का पता चला। जांच में सामने आया कि इस खाते में तेलंगाना, तमिलनाडु और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम पहुंची थी।
नौकरी के नाम पर खुलवाते थे म्यूल अकाउंट
जांच में पता चला कि आरोपी अलग-अलग नामों से बैंक खाते और फर्म खुलवाते थे। इसके बाद ठगी की रकम को कई खातों के जरिए इधर-उधर किया जाता और बाद में नकद निकाल लिया जाता था। पुलिस के मुताबिक, कुछ म्यूल बैंक खाते मासूम लोगों को नौकरी देने या वेतन खाता खोलने का झांसा देकर खुलवाए गए थे।
जांच में यस बैंक, फेडरल बैंक और एसबीआई समेत कई बैंकों में खोले गए खातों और फर्मों के इस्तेमाल का पता चला है। पुलिस का दावा है कि चेतन सहरावत इस सिंडिकेट का मुख्य हैंडलर था और बाकी आरोपी उसके निर्देश पर काम करते थे।
1.14 करोड़ से ज्यादा रकम होल्ड
बैंक खातों के विस्तृत विश्लेषण में कई ऐसे खाते मिले, जिनमें समान भेजने वाले और लाभार्थी थे। इससे रकम को एक संगठित नेटवर्क के जरिए अलग-अलग खातों में इधर-उधर किए जाने का संदेह सामने आया। पुलिस ने समयबद्ध कानूनी कार्रवाई करते हुए ₹1,14,84,394 की रकम होल्ड कराई है।
जांच में चेतन सहरावत के गौरव कादियान के साथ वित्तीय लेनदेन के अलावा माही इनोवेटिव सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (Mahi Innovative Solutions Pvt. Ltd) से करीब ₹94,000 के लेनदेन का भी पता चला है। कंपनी की ओर से पुलिस को एसबीआई खाते में सिसुपाल एंटरप्राइजेज (Sisupal Enterprises ) और प्लेंटिवा ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड (Plentiva Overseas Pvt. Ltd) की ओर से जमा कराई गई नकदी और आगे के लाभार्थियों से संबंधित जानकारी दी गई है।
यूएसडीटी और बाइनेंस कनेक्शन
पूछताछ में चेतन सहरावत ने कथित तौर पर यूएसडीटी (USDT ) और बाइनेंस (Binance) से जुड़े लेनदेन में शामिल होने की बात बताई है। हालांकि, पुलिस के मुताबिक उसने जांच के दौरान अपना मोबाइल फोन उपलब्ध नहीं कराया। अब पुलिस डिजिटल और क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन के जरिए ठगी की रकम के पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
विदेश भागने की कोशिश, LOC से गिरफ्तारी
पुलिस के मुताबिक, एफआईआर दर्ज होने के बाद मुख्य आरोपी चेतन सहरावत थाईलैंड भाग गया और वहां से दुबई चला गया। उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया। इसके बाद उसे आईजीआई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। वहीं, आरोपी तरुण भी दुबई भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन एलओसी जारी होने के बाद उसे मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पकड़ लिया गया।
109 चेकबुक बरामद
दिल्ली पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान 12 मोबाइल फोन और 109 चेकबुक बरामद की हैं। इसके अलावा बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, फर्म पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज, पैन और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज, कैश डिपॉजिट स्लिप और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी मिली है।
जांच के दौरान द ओलिम एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड (The Olim Enterprises Private Limited) के दस्तावेज भी मिले। पुलिस के मुताबिक, यह कंपनी उसी पते पर पंजीकृत थी और शक्ति गुर्जर तथा धर्मेंद्र कुमार इसके अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता थे।
ये छह आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें चेतन सहरावत को मुख्य हैंडलर बताया गया है। अन्य गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शक्ति गुर्जर, धर्मेंद्र कुमार, तरुण, दीपक और गौरव कादियान के रूप में हुई है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। आरोपियों के मोबाइल फोन और डिजिटल व क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन की जांच के बाद ठगी की रकम के पूरे प्रवाह का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस ने आगे और गिरफ्तारियां तथा बरामदगी होने की संभावना जताई है।
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