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कविराज शैलेंद्र जिनके हर गीत पर हैं सब निसार

‘किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, किसी का ग़म मिल सके तो ले उधार’, ‘आवारा हूं, आवारा हूं या गर्दिश में हूं आसमान का तारा हूं’ या फिर ‘दिल का हाल सुने दिलवाला सीधी सी बात न मिर्च मसाला’ जैसे अनेक गीतों की रचना करने वाले कविराज शैलेंद्र की आज जयंती है

Shail

शादी के बाद मुंबई में गृहस्थी जमाना मुश्किल होने लगा और तंगहाली और तंग होने लगी ऐसे में वह राज कपूर के पास गए जो फिल्म 'बरसात' बना रहे थे। फ़िल्म लगभग पूरी हो चुकी थी लेकिन दो गानों की गुंजाइश अभी भी बाक़ी  थी। राज कपूर ने गाने लिखने को कहा और शैलेंद्र ने लिखे ''बरसात में हमसे मिल तुम सजन, तुमसे मिले हम....." और ''पतली कमर है, तिरछी नज़र है....।”

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