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कविराज शैलेंद्र जिनके हर गीत पर हैं सब निसार

‘किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, किसी का ग़म मिल सके तो ले उधार’, ‘आवारा हूं, आवारा हूं या गर्दिश में हूं आसमान का तारा हूं’ या फिर ‘दिल का हाल सुने दिलवाला सीधी सी बात न मिर्च मसाला’ जैसे अनेक गीतों की रचना करने वाले कविराज शैलेंद्र की आज जयंती है

Shail

इसी 'बरसात' में शैलेंद्र और राज कपूर की दोस्ती यूं फूली-फली की 16-17 साल तक लहलहाती रही। 'बरसात' से लेकर 'मेरा नाम जोकर' तक राजकपूर की सभी फ़िल्मों के थीम गीत शैलेंद्र ने ही लिखे। राजकपूर उन्हें कविराज कहकर बुलाते थे। 'आवारा' फ़िल्म ने राजकपूर को दुनिया भर में लोकप्रिय बना दिया था और ''अवारा हूं, अवारा हूं, या ग़रदिश में हूं आसमान का तारा हूं'' गाना बेहद लोकप्रिय हुआ लेकिन शायद आपको जानकर हैरानी होगी कि राज कपूर ने शुरु में ये गाना ख़ारिज कर दिया था। शैलेंद्र ने एक लेख में लिखा था: "आवारा की कहानी सुने बिना, केवल नाम से प्रेरित होकर मैंने ये गीत लिखा था। मैंने जब सुनाया तो राजकपूर साहब ने गीत को अस्वीकार कर दिया। फ़िल्म पूरी बन गई तो उन्होंने मुझे फिर से गीत सुनाने को कहा और इसके बाद अब्बास साहब को गीत सुनाया। अब्बास साहब की राय हुई कि यह तो फ़िल्म का थीम गीत होना चाहिए।”

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