‘किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, किसी का ग़म मिल सके तो ले उधार’, ‘आवारा हूं, आवारा हूं या गर्दिश में हूं आसमान का तारा हूं’ या फिर ‘दिल का हाल सुने दिलवाला सीधी सी बात न मिर्च मसाला’ जैसे अनेक गीतों की रचना करने वाले कविराज शैलेंद्र की आज जयंती है
Shail
तीसरी कसम को बाद में कल्ट फ़िल्म माना गया। इस बेहतरीन निर्माण के लिए उन्हें राष्ट्रपति स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। मशहूर निर्देशक ख़्वाजा अहमद अब्बास ने इसे सैलूलाइड पर लिखी कविता बताया था।