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कविराज शैलेंद्र जिनके हर गीत पर हैं सब निसार

‘किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, किसी का ग़म मिल सके तो ले उधार’, ‘आवारा हूं, आवारा हूं या गर्दिश में हूं आसमान का तारा हूं’ या फिर ‘दिल का हाल सुने दिलवाला सीधी सी बात न मिर्च मसाला’ जैसे अनेक गीतों की रचना करने वाले कविराज शैलेंद्र की आज जयंती है

Shail

शैलेंद्र ने साहित्यकार फणिश्वर नाथ रेणु की कहानी पर जब तीसरी कसम फ़िल्म का निर्माण शुरू किया था, तब उनकी आर्थिक मुश्किलों का दौर शुरू हुआ। फ़िल्मी 'कारोबार' से उनका वास्ता पहली बार पड़ा था, वे क़र्ज़ में डूब गए और फ़िल्म की नाकामी ने उन्हें बुरी तोड़ दिया। ये भी कहा जाता है कि इस फ़िल्म की नाकामी की वजह से ही उनकी मृत्यु हुई। लेकिन दरअसल वह शराब बहुत पीते थे और इसी वजह से उनका लिवर ख़राब हो गया था जिसने 14 दिसंबर, 1966 को उनकी आख़िरकार जान ले ली। वह महज़ 43 साल के थे।

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