शैलेंद्र ने साहित्यकार फणिश्वर नाथ रेणु की कहानी पर जब तीसरी कसम फ़िल्म का निर्माण शुरू किया था, तब उनकी आर्थिक मुश्किलों का दौर शुरू हुआ। फ़िल्मी 'कारोबार' से उनका वास्ता पहली बार पड़ा था, वे क़र्ज़ में डूब गए और फ़िल्म की नाकामी ने उन्हें बुरी तोड़ दिया। ये भी कहा जाता है कि इस फ़िल्म की नाकामी की वजह से ही उनकी मृत्यु हुई। लेकिन दरअसल वह शराब बहुत पीते थे और इसी वजह से उनका लिवर ख़राब हो गया था जिसने 14 दिसंबर, 1966 को उनकी आख़िरकार जान ले ली। वह महज़ 43 साल के थे।
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