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गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, अब बिना इजाजत स्कूल में एंट्री नहीं, फोटो-वीडियोग्राफी पर भी रोक

गुजरात के स्कूलों में अब किसी भी बाहरी व्यक्ति को स्कूल के आचार्य की पूर्व अनुमति के बिना प्रवेश नहीं मिलेगा। स्कूल परिसर में बिना अनुमति फोटो खींचने और वीडियोग्राफी करने पर भी रोक रहेगी।

Gujarat Chief Minister Bhupendra Patel- India TV Hindi
Image Source : PEXELS.COM/PTI गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल

गुजरात सरकार की ओर से स्कूलों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया है। स्कूलों सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर ये फैसला लिया है। नए निर्देशों के मुताबिक, अब स्कूल परिसर में बिना अनुमति कोई बाहरी व्यक्ति दाखिल नहीं हो सकेगा। अभिभावकों के अलावा अन्य किसी भी व्यक्ति को स्कूल के आचार्य की पूर्व मंजूरी के बिना प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

निर्देशों के अनुसार, स्कूल परिसर में बिना अनुमति फोटो खींचने और वीडियोग्राफी करने पर भी प्रतिबंध रहेगा। यानी अब स्कूल की वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी भी नहीं कर सकेंगे। नियमों का उल्लंघन कर स्कूल में प्रवेश करने या बिना अनुमति फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बच्चों की दवा के नाम पर बेच रहे थे घोड़ों, गायों, भैंसों और बैलों वाला लिवर टॉनिक

इससे पहेल गुजरात से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई थी। यहां के सूरत शहर में बच्चों और आम नागरिकों की सेहत से खिलवाड़ करने का मामला सामने आया। सूरत स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने खाद्य एवं औषधि विभाग की टीम के साथ गोपीपुरा के मोमनावाद रोड स्थित शांतिनाथ मेडिकल स्टोर पर छापा मारकर संचालक मोहम्मद साजिद इब्राहिम मुल्ला को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी पशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘लिव.52 प्रोटेक लिक्विड एनिमल फीड सप्लीमेंट’ के 1 और 5 लीटर के पैक से तरल पदार्थ निकालकर 60 ML और 100 ML की छोटी बोतलों में भरता था। इसके बाद उन पर बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘लिव.52 ड्रॉप्स’ जैसे उत्पाद के कथित नकली लेबल लगाकर बाजार में बेचा जाता था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पशुओं के लिए बने 1 लीटर के पैक की कीमत करीब 330 रुपये थी, जबकि 60 ML की मानव उपयोग वाली दवा की बताई गई MRP 160 रुपये थी। पुलिस को आशंका है कि आरोपी इस तरीके से अवैध मुनाफा कमा रहा था और पूछताछ में करीब 1,000 बोतलें बेचने की बात सामने आई है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी पिछले करीब एक साल से इस गतिविधि में शामिल था। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित नकली बोतलें किन क्षेत्रों में बेची गईं और क्या उनकी आपूर्ति अन्य मेडिकल स्टोर, अस्पतालों या क्लीनिकों तक भी की गई थी। करीब 20 साल पुराने इस मेडिकल स्टोर के संचालन संबंधी लाइसेंस हाल ही में जारी होने की जानकारी सामने आई। बताया गया है कि दुकान आरोपी की बी.फार्म की पढ़ाई पूरी कर चुकी बेटी के फार्मासिस्ट लाइसेंस के आधार पर संचालित हो रही थी। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कथित अवैध गतिविधि में अन्य लोग शामिल थे या नहीं। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं 123, 125, 336(2), 336(3), 336(4) और 278 सहित अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किए जाने की जानकारी है। SOG अब नकली लेबल छापने, बोतलों की आपूर्ति और संभावित नेटवर्क की जांच कर रही है।

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