सेहत से जुड़ी कई समस्याओं के इलाज के लिए साइंटिस्ट्स ने विज्ञान की मदद से कई खोज की हैं। दुनिया भर में बहुत से लोग इनफर्टिलिटी की वजह से बच्चे पैदा नहीं कर पाते हैं। कुछ लोग आईवीएफ की मदद लेने के बाद भी पैरेंट्स नहीं बन पाते हैं। अगर आप पैरेंट्स बनना चाहते हैं लेकिन कंसीव नहीं कर पा रहे हैं, तो आपको इस रिसर्च के बारे में जरूर जानकारी हासिल कर लेनी चाहिए।
साइंटिस्ट्स की रिसर्च
आपको बता दें कि रिसर्चर्स को त्वचा कोशिकाओं यानी स्किन सेल्स से मानव अंडे बनाने में कामयाबी हासिल हुई है। इस रिसर्च से दुनिया भर में मौजूद कई ऐसे लोगों को उम्मीद मिलेगी जो बच्चे पैदा करने में असमर्थ हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इस प्रक्रिया को लागू करने से पहले साइंटिस्ट्स को कम से कम एक दशक तक एक्सपेरिमेंट करना होगा।
कैसे कंडक्ट की गई स्टडी?
आइए जानते हैं कि ये प्रक्रिया काम कैसे करती है। सबसे पहले न्यूक्लियस लिया जाता है। आपको बता दें कि न्यूक्लियस में हमारे अधिकांश जेनेटिक कोड होते हैं। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक एवरेज ह्यूमन स्किन सेल को डोनर एग में इम्प्लांट किया जाता है और इसका अपना जेनेटिक कोड हटा दिया गया होता है। अगर ये रिसर्च पूरी तरह से सफल हो जाती है, तो बच्चे बिना बायोलॉजिकल मदर के यानी बिना मां के गर्भ के पैदा हो सकेंगे। दुनिया भर में जो महिलाएं किसी भी कारण से गर्भधारण नहीं कर पातीं, वो भी मां बन पाएंगी।
गौर करने वाली बात
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस प्रक्रिया को लागू करने से पहले इससे जुड़े नैतिक और कानूनी प्रश्नों पर भी काफी कुछ सोचने की जरूरत है। ये स्टडी नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित हुई है। इस अध्ययन को ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी द्वारा संस्थान के निदेशक शौकरत मितालिपोव के नेतृत्व में कंडक्ट किया गया था।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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