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जानलेवा हो सकता है ब्लड कैंसर, एक्सपर्ट बता रहे हैं कैसे होती है शुरुआत और किन संकेतों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए नज़र अंदाज़

ब्लड कैंसर, जिसे हम ल्यूकेमिया, लिंफोमा या मायलोमा के रूप में भी जानते हैं, एक गंभीर बीमारी है जो खून बनाने वाली प्रणाली को प्रभावित करती है।

ब्लड कैंसर- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV ब्लड कैंसर

ब्लड कैंसर, जिसे हम ल्यूकेमिया, लिंफोमा या मायलोमा के रूप में भी जानते हैं, एक गंभीर बीमारी है जो खून बनाने वाली प्रणाली को प्रभावित करती है। इस बीमारी में शरीर के बोन मैरो यानी अस्थि मज्जा में बनने वाली खून की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, जिससे शरीर का संतुलन बिगड़ता है। यह कैंसर धीरे-धीरे बढ़ता है और अगर समय रहते इसकी पहचान न हो, तो जानलेवा भी हो सकता है।

ब्लड कैंसर की शुरुआत कैसे होती है?

हमारे शरीर में रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स जैसी कोशिकाएं हड्डियों के अंदर मौजूद बोन मैरो में बनती हैं। जब इनमें से कोई एक कोशिका डीएनए स्तर पर खराब हो जाती है और अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती है, तो वह कैंसर का रूप ले सकती है। यह कोशिकाएं शरीर के अन्य हिस्सों में फैलकर अंगों के काम को भी प्रभावित करने लगती हैं।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज:

  • बार-बार बुखार या संक्रमण होना: ब्लड कैंसर में व्हाइट ब्लड सेल्स की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इसका नतीजा होता है बार-बार बुखार आना या मामूली चोट पर भी संक्रमण हो जाना।

  • अत्यधिक थकान और कमजोरी: शरीर में रेड ब्लड सेल्स की कमी के कारण ऑक्सीजन ठीक से नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीज को बिना कोई मेहनत किए भी थकान और कमजोरी महसूस होती है।

  • बार-बार नाक से या मसूड़ों से खून आना: ब्लड कैंसर में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है, जिससे खून का थक्का नहीं बन पाता और खून बहने की समस्या होती है।

  • बिना वजह वजन घटना और भूख न लगना: अगर व्यक्ति का वजन बिना किसी कोशिश के लगातार कम हो रहा है, और भूख भी कम लग रही है, तो यह शरीर में कुछ गंभीर संकेत दे सकता है।

  • हड्डियों या जोड़ो में दर्द: कैंसर कोशिकाएं जब बोन मैरो में इकट्ठा हो जाती हैं, तो यह हड्डियों और जोड़ो में दर्द का कारण बनती हैं, विशेषकर पीठ और पैरों में।

ब्लड कैंसर का इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए जरूरी है समय पर पहचान और उपचार की शुरुआत। अगर ऊपर बताए गए लक्षण लगातार दिखाई दें, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें। याद रखें, जल्दी पहचान से इलाज आसान होता है और जिंदगी बचाई जा सकती है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

 

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