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बच्चों को हड्डियों को कैसे मजबूत बनाएं, किन लक्षणों को नजरअंदाज करना है खतरनाक, पीडियाट्रिक्स से जानें

बच्चों की बढ़ती उम्र में हड्डियों का विकास तेजी से होता है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। बचपन में सही पोषण, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय पर समस्या की पहचान से बच्चों को हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं से बचाया जा सकता है।

बच्चों की हड्डियों को कैसे मजबूत बनाएं- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV बच्चों की हड्डियों को कैसे मजबूत बनाएं

आजकल माता पिता बच्चों की लंबाई पर पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन लंबाई हड्डियों के विकास से जुड़ी हुई होती है। बच्चों का हेल्दी डेवलपमेंट सिर्फ उनकी लंबाई और वजन बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी हड्डियों, मांसपेशियों और जोड़ों का सही विकास भी उतना ही जरूरी है। बचपन में हड्डियों का मजबूत होना आगे चलकर बेहतर शारीरिक क्षमता और स्वस्थ जीवन की नींव रखता है। हालांकि, कई बार माता-पिता बच्चों के पैरों में दर्द, चलते समय लंगड़ाने, बार-बार गिरने या फिजिकल एक्टिविटी से बचने जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। विश्व बाल अस्थि और जोड़ दिवस 2019 के मौके पर डॉक्टर से जानते हैं कि बच्चों की हड्डियों को कैसे मजबूत बनाया जाए।

बच्चों में हड्डियों का विकास क्यों है महत्वपूर्ण?

बचपन ये लेकर युवा अवस्था तक हड्डियों के बनने और मजबूती होने का अहम चरण है। इस वक्त शरीर में हड्डियों का विकास तेजी से होता है। इसके लिए शरीर में भरपूर कैल्शियम, विटामिन डी, प्रोटीन और बैलेंस डाइट लेना जरूरी है। अच्छी डाइट शरीर को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है। इसके अलावा दौड़ना, खेलना, कूदना और उम्र के हिसाब से शारीरिक गतिविधियां हड्डियों और मांसपेशियों के विकास में मदद करती हैं।

पीडियाट्रिक्स डॉक्टर विवेक जैन (चेयरपर्सन, पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट डेवलपमेंट एवं प्रिंसिपल डायरेक्टर, बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली) के अनुसार, बच्चों के शारीरिक विकास के दौरान उनकी हड्डियों और जोड़ों की सेहत पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। सही पोषण, धूप में रहना, नियमित खेलकूद और समय-समय पर बच्चे की जांच से हड्डियों के बेहतर विकास को बढ़ाया जा सकता है।

ये लक्षण हो सकते हैं खतरनाक

अगर बच्चों में हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याएं आ रही हैं तो उन्हें नजरअंदाज न करें। लगातार दर्द बने रहना, जोड़ों में सूजन, चलने में परेशानी, लंगड़ाना, हाथ-पैरों की गतिविधियों में कमी या किसी अंग के आकार या बनावट में कोई फर्क दिखे तो ऐसे में बच्चे को तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। अगर बच्चा बार-बार किसी काम को करने से बच रहा है या पहले की तुलना में कम सक्रिय है तो इसका कारण हड्डियों में दर्द या शारीरिक परेशानी भी हो सकती है। हालांकि हल्का दर्द कोई गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन लगातार बने रहने वाला दर्द, सूजन या चलने में परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लें। अगर बच्चा अचानक से चलना बंद कर दे, तेज दर्द हो या जोड़ों में सूजन के साथ बुखार आए तो डॉक्टर से मिलें।

सही पोषण से मजबूत बनेंगी हड्डियां

बच्चों की हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए खाने में दूध, दही, पनीर, रागी, तिल, दालें और दूसरे हेल्दी भोजन को शामिल करें। शरीर में विटामिन डी कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है, इसलिए इसकी पर्याप्त मात्रा का होना जरूरी है। बच्चों में विटामिन डी या कैल्शियम की कमी होने पर जांच कराएं और उसके हिसाब से ही डॉक्टर की सलाह पर बच्चों को सही सप्लीमेंट दें। बच्चों को खुद से कोई दवा न खिलाएं। बच्चों को फोन और टीवी से दूर रखें और ज्यादा से ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी कराएं। इससे हड्डियां मजबूत होंगी और मांसपेशियों में भी ताकत आएगी।

बढ़ती उम्र के साथ सही निगरानी भी जरूरी

बच्चों में कुछ हड्डी और जोड़ से जुड़ी समस्याएं जन्म से भी हो सकती हैं, जबकि कुछ विकास के दौरान सामने आती हैं। पैरों का असामान्य रूप से मुड़ना, चाल में बदलाव, पैरों की लंबाई में स्पष्ट अंतर या शारीरिक विकास में असामान्यता दिखने पर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। इसी तरह, खेलकूद के दौरान लगी चोट को केवल सामान्य दर्द समझकर लंबे समय तक टालना भी उचित नहीं है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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