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मोटापे के मामले में भारत के बच्चे वर्ल्ड में दूसरे नंबर पर, World Obesity Atlas 2026 की रिपोर्ट ने चौंकाया

विश्व मोटापा दिवस के मौके पर World Obesity Atlas 2026 की एक रिपोर्ट सामने आई है जिसने सभी को हैरान कर दिया है। World Obesity Atlas 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों में मोटापे के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है।

बच्चों में बढ़ता मोटापा - India TV Hindi
Image Source : FREEPIK बच्चों में बढ़ता मोटापा

हर साल 4 मार्च को विश्व मोटापा दिवस (World Obesity Day) मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य मोटापे के प्रति जागरूकता फैलाना और इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए समाधान खोजना है। इस बार विश्व मोटापा दिवस के मौके पर, एक नई रिपोर्ट ने भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य भविष्य पर गहरा संकट खड़ा कर दिया है। विश्व मोटापा महासंघ द्वारा जारी वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 से पता चलता है कि मोटापे और अधिक वजन से ग्रस्त बच्चों की कुल संख्या के मामले में भारत, चीन के बाद अब वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर है। शोधकर्ताओं को सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि ये आंकड़े कितनी तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत में बच्चों में होने वाले मोटापे के मामले में औसतन हर साल लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है, जो वैश्विक स्तर पर दर्ज की गई सबसे तेज वृद्धि में से एक है।

भारत में बच्चों में मोटापे का आंकड़ा काफी तेजी से बढ़ रहा 
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में बच्चों में मोटापे काफी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। भारत में बड़ी संख्या में बच्चे ज्यादा वजन की समस्या से जूझ रहे हैं। विश्व मोटापा दिवस पर जारी किए गए विश्व मोटापा एटलस 2026 के अनुसार, भारत में 2025 में पांच से नौ वर्ष की आयु के लगभग 1.5 करोड़ बच्चे और 10 से 19 वर्ष की आयु के 2.6 करोड़ से अधिक बच्चे अधिक वजन वाले या मोटापे की समस्या से परेशान हैं। इसी वजह से भारत बच्चों में हाई BMI के मामलों में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। 

बच्चों में क्यों बढ़ रहा मोटापा?

खान-पान में बदलाव
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड: चिप्स, बिस्कुट, इंस्टेंट नूडल्स और पैकेट वाले स्नैक्स अब घरों में नियमित हिस्सा बन गए हैं। इनमें फैट, चीनी और सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है।

मीठे पेय पदार्थ

कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस और एनर्जी ड्रिंक्स के अधिक सेवन से शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा हो रही है।

फास्ट फूड

बाहर खाना या ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना आसान हो गया है, जिससे बच्चे अक्सर पिज्जा, बर्गर जैसे हाई-कैलोरी फूड्स का सेवन करते हैं।

शारीरिक गतिविधियों में कमी

बढ़ता स्क्रीन टाइम

बच्चे अब बाहर मैदान में खेलने के बजाय मोबाइल फोन, टैबलेट और वीडियो गेम्स पर घंटों बिताते हैं। एक सर्वे के अनुसार, 11-17 वर्ष के लगभग 74% किशोर पर्याप्त शारीरिक व्यायाम नहीं करते।

माइंडलेस ईटिंग

टीवी या मोबाइल देखते हुए खाना खाते समय बच्चों को अपनी भूख और पेट भरने का अहसास नहीं होता, जिससे वे ओवरईटिंग कर लेते हैं।

नींद की कमी और तनाव
अध्ययनों से पता चलता है कि जो बच्चे पर्याप्त नींद नहीं लेते, उनका मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है।

पढ़ाई का बोझ और देर रात तक जागने की आदत शरीर में हॉर्मोन्स का संतुलन बिगाड़ देती है, जिससे वजन बढ़ता है।

आने वाली पीढ़ी के लिए बड़ा जोखिम
चिंता सिर्फ शरीर के वजन को लेकर नहीं है। चिकित्सा शोधकर्ता बच्चों में मोटापे को गंभीर आने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का एक प्रमुख कारण बता रहे हैं। विश्व मोटापा एटलस का अनुमान है कि यदि ऐसे ही मोटापे की संख्या बढ़ती रही तो 2040 तक भारतीय युवाओं में कई चयापचय संबंधी बीमारियों में तेजी से वृद्धि होगी। 

  • मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (एमएएसएलडी), जिसे पहले फैटी लिवर डिजीज कहा जाता था, के मामले 8.39 मिलियन से बढ़कर 11.88 मिलियन हो सकते हैं।
  • हाई ट्राइग्लिसराइड लेवल, जो हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाता है, 60 लाख से अधिक बच्चों को प्रभावित कर सकता है।
  • हाई ब्लड प्रेशर के लगभग 42 लाख मामले होने का अनुमान है।
  • हाइपरग्लाइसेमिया, जो डायबिटीज का एक प्रारंभिक संकेतक है, लगभग 20 लाख युवाओं को प्रभावित कर सकता है।

कैसे किया जाए कंट्रोल

विश्व मोटापा महासंघ, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई) और ऑल इंडिया एसोसिएशन फॉर एडवांस्ड रिसर्च इन ओबेसिटी (एआईएएआरओ) जैसे साझेदारों के साथ मिलकर मोटापा कम करने के लिए रणनीति अपना रहा है। इस रणनीति में चीनी पर टैक्स लगाना, नाबालिगों तक जंक फूड के विज्ञापनों को पहुंचने से रोकने के लिए सख्त डिजिटल मार्केटिंग नियम बनाना और प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली में मोटापे की जांच को एकीकृत करना शामिल है। जोहाना राल्स्टन ने निष्कर्ष निकाला, "भारत में इस लड़ाई में क्षेत्र का नेतृत्व करने की क्षमता है।

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