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8 घंटे से कम नींद लेने से दिमाग पर क्या असर पड़ता है?

 Written By: Ritu Raj
 Published : Mar 05, 2026 03:24 pm IST,  Updated : Mar 05, 2026 03:24 pm IST

8 घंटे से कम नींद लेना सिर्फ थकान का मामला नहीं है। यह आपके दिमाग के "सॉफ्टवेयर" और "हार्डवेयर" दोनों को प्रभावित करता है। जब आप पर्याप्त नहीं सोते, तो आपका मस्तिष्क उस टॉक्सिन्स को साफ नहीं कर पाता जो दिन भर के काम के दौरान जमा होता है। चलिए जानते हैं 8 घंटे से कम नींद लेने से दिमाग पर क्या असर होता है।

8 घंटे से कम नींद लेने से दिमाग पर क्या असर पड़ता है?- India TV Hindi
8 घंटे से कम नींद लेने से दिमाग पर क्या असर पड़ता है? Image Source : FREEPIK

नींद हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी है। ये रीसेट बटन की तरह है। सोने से हमारी बॉडी को दोबारा से एनर्जी मिलती है, जिससे आपकी बॉडी फिर से काम करने के लिए तैयार हो जाती है। लेकिन आजकल खराब लाइफस्टाइल की वजह से लोग न समय पर सो रहे और न ही 8 घंटे की पूरी नींद ले रहे हैं। कुछ लोग तो 8 घंटे से भी कम नींद लेते है। लेकिन क्या आपको मालूम है कि 8 घंटे से कम नींद लेने से हमारे दिमाग पर क्या असर होता है। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं 8 घंटे से कम नींद लेने से क्या होगा।

1. याददाश्त और सीखने की क्षमता में कमी

नींद के दौरान आपका दिमाग यादों को 'सेव' करता है इसे Memory Consolidation कहते हैं। कम सोने से नई जानकारी को याद रखना मुश्किल हो जाता है। दरअसल दिमाग की 'हिप्पोकैम्पस' नाम की ग्रंथि, जो यादें बनाती है, कम नींद के कारण सही से काम नहीं कर पाती।

2. एकाग्रता और निर्णय लेने में दिक्कत
नींद की कमी का असर आपके Prefrontal Cortex पर पड़ता है, जो तर्क और योजना बनाने के लिए जिम्मेदार है। नींद की कमी की वजह से आप छोटे-छोटे फैसले लेने में उलझ सकते हैं और आपका ध्यान बार-बार भटकने लगता है। शोध बताते हैं कि 24 घंटे तक न सोना वैसा ही है जैसे कि शरीर में 0.10% अल्कोहल का स्तर होना यानी आप बिना शराब पिए नशे जैसी स्थिति में होते हैं।

3. भावनात्मक अस्थिरता 
क्या आपने गौर किया है कि कम सोने पर आप जल्दी चिढ़ जाते हैं? दिमाग का इमोशनल सेंटर, जिसे Amygdala कहते हैं, नींद की कमी में 60% ज्यादा सक्रिय हो जाता है, जिससे आप छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा, तनाव या उदासी महसूस करने लगते हैं।

4. अल्जाइमर का खतरा
गहरी नींद के दौरान दिमाग का Glymphatic System सक्रिय होता है, जो बीटा-एमाइलॉयड जैसे जहरीले प्रोटीन को बाहर निकालता है। लगातार नींद की कमी से ये टॉक्सिन्स दिमाग में जमा होने लगते हैं, जो भविष्य में अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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