Erectile Dysfunction: इरेक्टाइल डिस्फंक्शन एक आम और परेशान करने वाली स्थिति है जो दुनिया भर में बड़ी संख्या में पुरुषों को प्रभावित कर रही है। इसकी वजह से पुरुषों में इनफर्टिलिटी तेजी से बढ़ रही है। मेडिकल टर्म में समझें तो इस स्थिति में लिंग में ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है और इस वजह से ये डिस्फंक्शन हो जाता है और प्रजनन के दौरान काम नहीं करता। इससे फर्टिलाइजेशन मुश्किल होता है और इनफर्टिलिटी पैदा होती है। लेकिन, सवाल ये है कि इरेक्टाइल डिस्फंक्शन क्यों होता है। तो, आइए जानते हैं इस बीमारी का कारण डॉ. चिराग भंडारी, इंस्टीट्यूट ऑफ एंड्रोलॉजी एंड सेक्सुअल हेल्थ (Institute of Andrology and Sexual Health) के संस्थापक से।
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन क्यों होता है-Causes of Erectile Dysfunction
1. इन बीमारियों से ग्रसित पुरुषों में ज्यादा होता है इरेक्टाइल डिस्फंक्शन
इरेक्टाइल डिस्फंक्श कुछ बीमारियों के रोगियों में ज्यादा हो सकता है जैसे
-हृदय रोगियों में
-एथेरोस्क्लेरोसिस
-हाई कोलेस्ट्रॉल के मरीजों में जिससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित रहता है और इरेक्शन से जुड़ी समस्या आती है।
-डायबिटीज के मरीजों में जिनमें नसों और ब्लड वेसेल्स को नुकसान पहुंचा सकता है, जो इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का कारण बनता है।
2. क्रोनिक न्यूरोलॉजिकल कंडीशन
मल्टीपल स्केलेरोसिस और पार्किंसंस रोग सहित क्रोनिक न्यूरोलॉजिकल कंडीशन, लिंग के तंत्रिका संकेतों को बाधित कर सकती हैं, जिससे इरेक्टाइल डिस्फंक्शन हो सकता है। इसके अलावा पेरोनी की बीमारी (Peyronie's disease), जो लिंग के अंदर टेढ़ापन पैदा कर सकती है और इरेक्शन पर प्रभाव डाल सकती है, ये भी इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की वजह बन सकती है।
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3. साइकोलॉजिकल फैक्टर्स
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन, कई मनोवैज्ञानिक कारणों से भी हो सकता है जिसमें रिश्ते में तनाव और चिंता यौन क्रिया में बाधा डाल सकती है। अवसाद, एक मनोदशा विकार, यौन इच्छा और उत्तेजना को कम कर सकता है।
4. अनहेल्दी लाइफस्टाइल
अनहेल्दी लाइफस्टाइल जैसे कि धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन और नशीली दवाओं का उपयोग जैसी चीजें इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का कारण बन सकती है। इनएक्टिव लाइफस्टाइल और खराब डाइट भी इस समस्या का कारण बन सकती है।
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन से कैसे बचें-Prevention tips for Erectile Dysfunction
डॉ. चिराग भंडारी बताते हैं कि स्वस्थ जीवनशैली पर जोर देना सबसे जरूरी है। नियमित शारीरिक गतिविधि और एक्सरसाइज से हृदय स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है और स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा प्रोसेस्ड और हाई फैट वाले खाद्य पदार्थों को सीमित करते हुए फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और प्रोटीन को अपनी डाइट में शामिल करें। नियमित मेडिकल टेस्ट के माध्यम से डायबिटीज और हृदय रोग जैसी पुरानी स्थितियों मैनेज करके चलें। स्मोकिंग बंद करें। शराब के सेवन को नियंत्रित करें और स्ट्रेस कम करने के लिए ध्यान, योग या माइंडफुलनेस जैसी तकनीकों के माध्यम से स्टैस मैनेज करें।
(ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)
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