आजकल बिना मोबाइल के बच्चों को पालना लोगों को एक बहुत बड़ा टास्क है। सेलफोन के बिना, ना बच्चे रह पा रहे हैं और ना ही बड़े। बच्चे हो या बड़े, जब वो मोबाइल से चिपके होते हैं। उस वक्त उनसे बात भी करो तो ऐसे इग्नोर करते हैं जैसे सुना ही नहीं। इस वजह से बच्चों की फिज़िकल-मेंटल ग्रोथ पर ब्रेक लग जाती है और इसी का नतीजा है कि बच्चों में ऑटिज़्म जैसा घातक रोग हेल्थ एक्सपर्ट से लेकर पेरेंट्स तक के लिए एक चैलेंज बनता जा रहा है।
इस बीमारी की गिरफ्त में आए बच्चे ना तो ठीक से बोल-समझ पाते हैं और ना ही नई नई चीज़े सीखने में वो दूसरो की तरफ शार्प होते हैं और ना ही वो घरवालों से ना बाहरवालों से अच्छे से कम्युनिकेट कर पाते हैं। यही वजह है कि कई देश फोन के इस्तेमाल को लेकर सख्ती अपना रहे हैं। पूरे देश में नो फोन कोड को लेकर सख्त कदम उठाए जाने चाहिए जैसे रोगों से जंग जीतने के लिए स्वामी रामदेव इंडिया टीवी के साथ मिलकर चला रहे हैं।
मेंटल हेल्थ के दुश्मन
मेंटल हेल्थ के प्रमुख दुश्मनों में सिज़ोफ्रेनिया, अल्ज़ाइमर, पार्किंसन, डिमेंशिया, ऑटिज़्म और घरेलू हिंसा जैसे कारक शामिल हैं, जो बच्चों की सोच, व्यवहार और भावनात्मक संतुलन पर गहरा असर डालते हैं
कैसी होनी चाहिए बच्चों की डाइट चार्ट?
बच्चों की सेहत और तेज दिमाग के लिए उनकी डाइट में रोज़ाना 1 कटोरी दाल, 2 कटोरी सब्ज़ी, 1 कटोरी फल, लगभग 500 ml दूध और अन्य डेयरी प्रोडक्ट शामिल होने चाहिए, साथ ही 5 बादाम और 5 अखरोट भिगोकर पीसकर उसमें ब्राह्मी, शंखपुष्पी और ज्योतिषमति मिलाकर सेवन करने से याददाश्त और मानसिक विकास बेहतर होता है।
फ़िज़िकल ग्रोथ होगी बेहतर
बच्चों की बेहतर फ़िज़िकल ग्रोथ के लिए रोज़ाना आंवला-एलोवेरा जूस, दूध के साथ शतावरी और खजूर का सेवन फायदेमंद है, साथ ही उनकी डाइट में दूध, ड्राई फ्रूट्स, ओट्स, बींस, मसूर की दाल और शकरकंद जैसे पौष्टिक आहार शामिल करने चाहिए। बच्चों की बेहतर ग्रोथ के साथ उनकी मेमोरी तेज, कंसंट्रेशन मजबूत और दिमाग तेज़ बनाने में मददगार।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें
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