दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का आज सुबह 5:20 बजे निधन हो गया। नाना पाटेकर अपने घर पर थे जहां उन्हें ज़बरदस्त कार्डियक अरेस्ट आया, परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन नाना पाटेकर को बचाया नहीं जा सका। डॉक्टर शेखर सालकर (प्रमुख, ऑन्कोलॉजी विभाग, मणिपाल अस्पताल) ने बताया कि 45 मिनट तक लगातार CPR देने के बावजूद नाना पाटेकर को बचाया नहीं जा सका। कार्डियक अरेस्ट से उनकी मौत हो गई।
कार्डियक अरेस्ट से हुई नाना पाटेकर की मौत
आपका बता दें कार्डियक अरेस्ट काफी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। डॉक्टर बलबीर सिंह (चेयरमैन, कार्डियक साइंस, मैक्स हॉस्पिटल) के मुताबिक जब कोई मौत सोते-सोते हो जोए तो उसका कारण एरिथमिया होता है। जब कोई मौत डांस करते, जिम करते, साइकिल चलाते या कोई भी एक्टिविटी करते हुए अचानक से गिर जाएं और मौत हो जाए तो ऐसा लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम की वजह से होता है। साथ ही जेनेटिक सिंड्रोम की वजह से भी दिल की धड़कने रुक जाती हैं। खराब कॉलेस्ट्रल बढ़ने की वजह से कई बार लोगों की मौत हो जाती है। इसके लिए हर किसी को हाई सेंसिटिविटी सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट करना चाहिए। किसी की हार्ट हिस्ट्री अगर हार्ट संबंधी होती है तो उसका असर सीधा होता है।
हार्ट अचानक और अप्रत्याशित रूप से ब्लड पंप करना बंद कर देता है, तो मरीज में कार्डियक अरेस्ट होता है। और इसकी वजह से ब्रेन और दूसरे अंगों में खून की सप्लाई रुक जाती है या कम हो जाती है। कुछ अर्यथमिया (arrhythmias), जिनमें ह्रदय से शरीर में खून जाना पूरी तरह से बंद हो जाती है, कार्डियक अरेस्ट के कारण बन सकते हैं। कार्डियक अरेस्ट में अचानक से दिल की धड़कन बंद हो जाती है। ऐसी स्थिति में मरीज का ब्लड प्रेशर और पल्स एकदम रुक जाती है। कार्डियक अरेस्ट हार्ट अटैक से ज्यादा खरतनाक स्थिति है। कार्डियक अरेस्ट से जान जाने का खतरा कहीं ज्यादा होता है।
सीपीआर देकर बचाई जा सकती है जान
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में सीपीआर देकर मरीज की जान बचाई जा सकती है। सीपीआर देने के लिए पहले अपने बाएं हाथ को आगे की ओर सीधा करें। अब उसके ऊपर अपना दायां हाथ रखें और दाएं हाथ की उंगलियों को अंदर की ओर करते हुए बंद कर लें। अब मरीज के छाती में बीच में हथेलियों के दबाते हुए तेज और धीरे दवाब डालें। आपको 100 से 120 टाइम ऐसा करना है। आपको लगातार एक रिदम के साथ ऐसा करना है। चेस्ट कंप्रेशन के बाद रुकें और मरीज को मुंह से सीपीआर देने की कोशिश करें। आपको बिना रुके 30 सेकेंड के लिए मरीज कुछ देर के लिए सांस देनी है। स्टडीज में सामने आया है कि अगर मरीज को कार्डियक अरेस्ट आने के 5 मिनट के अंदर सही तरीके से सीपीआर दिया जाए और हॉस्पिटल पहुंचाया जाए तो जान बच सकती है।
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