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गट हेल्थ से जुड़ा है डायबिटीज टाइप 2 और फैटी लिवर का खतरा, डॉक्टर ने बताया क्या है इसका कारण और कैसे बचें

डायबिटीज टाइप 2 और फैटी लिवर का कनेक्शन आपकी गट हेल्थ से भी है। हाल ही में कनाडा के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे गट बैक्टीरिया के बारे में पता लगाता है जो इन बीमारियों के खतरे को कई गुना बढ़ाता है।

गट हेल्थ - India TV Hindi
Image Source : FREEPIK गट हेल्थ

गट हेल्दी रहेगी तो शरीर भी स्वस्थ रहेगा। लिवर से लेकर डायबिटीज तक कई बीमारियों का सीधा कनेक्शन आपकी गट हेल्थ से है। गट में पाए जाने वाले बैक्टीरिया और उनकी मात्रा आपकी हेल्थ को काफी प्रभावित करते हैं। कनाडा के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे गट बैक्टीरिया के बारे में पता लगाया है, जो डायबिटीज टाइप 2 और फैटी लिवर का खतरा बढ़ाते हैं। मैकमास्टर विश्वविद्यालय, यूनिवर्सिटी लावल और ओटावा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने दिखाया है कि आंत में सूक्ष्मजीवों से उत्पादित एक Microbes (अणु) खून में होकर लिवर को ज़रूरत से ज़्यादा ग्लूकोज़ और फैट बनाने के लिए प्रेरित कर सकता है। लेकिन शोधकर्ताओं ने इस Microbes (अणु) को खून में घुसने से पहले ही आंत में फंसाने का एक तरीका विकसित किया। वैज्ञानिकों ने इसका परीक्षण मोटापे से ग्रस्त चूहों पर किया जिनके ब्लड शुगर और फैटी लिवर में सुधार देखा गया।

डॉ. अनुभव जैन (सीनियर कंसल्टेंट और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के यूनिट हेड, मैक्स हॉस्पिटल, गुरुग्राम) ने बताया कि डी लैक्टेट, एल लैक्टेट का स्टीरियोआइसोमर है जो गट में ग्लूकोज से पनपता है। जो बैक्टीरियल फर्मेंटेशन से बनता है। हम इंसान सामान्य रूप से डी लैक्टेट को एल-लैक्टेट के मुकाबले धीरे मेटाबॉलाइज्ड कर पाते हैं। डी लैक्टेट तब अधिक बनता है जब आंत में अनहेल्दी बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं और शॉर्ट बाउल सिंड्रोम में, जिसमें छोटी आंत की लंबाई किसी सर्जरी के बाद कम कर दी जाती है। 

गट से जुड़ा है फैटी लिवर और डायबिटीज टाइप 2

हाल की एक स्टडी में पाया गया है कि चूंकि डी लैक्टेट का चयापचय धीरे-धीरे होता है, इसलिए लिवर में एक्यूमुलेशन से लिवर ग्लाइकोजन और ट्राइग्लिसराइड्स में बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे बल्ड शुगर में भी वृद्धि होगी। इससे फैटी लिवर और बाद में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाएगा।

गट हेल्थ में सुधार के लिए डाइट

इससे बचने के लिए आपको हेल्दी डाइट लेना जरूरी है। जिसमें होल ग्रेन यानि साबुत अनाज, नॉन प्रोसेस्ड फूड और एंटीबायोटिक दवाओं का कम से कम उपयोग करें। बाहर खाने से बचें, प्राकृतिक खाद्य उत्पादों से भरपूर मेडिटेरियन डाइट लें। सिंपल शुगर और प्रोबायोटिक्स का सेवन करने से बचें। 

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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