कोलन कैंसर आमतौर पर उम्र बढ़ने पर होने वाली समस्या थी, लेकिन पिछले कुछ सालों में युवाओं में कोलन कैंसर के मामले भी काफी बढ़ रहे हैं। इसकी शुरुआत आमतौर पर कोलन के अंदर बनने वाले छोटे-छोटे कोशिकाओं के गुच्छों से होती है जिन्हें पॉलीप्स कहते हैं। पॉलीप्स आमतौर पर कैंसरयुक्त नहीं होते हैं, लेकिन समय के साथ कुछ पॉलीप्स कोलन कैंसर में बदल सकते हैं। पॉलीप्स अक्सर लक्षण पैदा नहीं करते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर आंत में पॉलीप्स की जांच के लिए नियमित स्क्रीनिंग टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। पॉलीप्स का पता लगाकर उन्हें हटाने से आंत के कैंसर को रोकने में मदद मिलती है। कोलन कैंसर को कभी-कभी कोलोरेक्टल कैंसर भी कहा जाता है। इस शब्द में कोलन कैंसर और रेक्टल कैंसर दोनों शामिल हैं, जो मलाशय में शुरू होता है।
एम्स ट्रेंड डॉक्टर और गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉक्टर सौरभ सेठी ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर किया है जिसमें वो बता रहे हैं कि युवा महिलाओं में कोलन कैंसर का खतरा तेजी से पनप रहा है। इसके कई कारण हैं जो आपकी लाइफस्टाइल से जुड़े हैं।
कई बार महिलाओं में कोलन कैंसर के लक्षण पीरियड जैसे होते हैं, जैसे क्रैम्पिंग, ब्लोटिंग, मल त्याग की आदतों में बदलाव हो सकता है। लंबे समय तक महिलाएं इन लक्षणों को नजरअंदाज करती रहती है जो धीरे-धीरे कोलन कैंसर में तब्दील हो जाता है। जब तक महिलाएं समझ पाती हैं तब तक 4 में से 3 महिलाओं का कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच चुका होता है।
कोलन कैंसर का कारण क्या है?
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युवा पीढ़ी में कोलन कैंसर का खतरा बढ़ाने का बड़ा कारण अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड को माना जा रहा है। हाई प्रोसेस्ड खाना आंतों में माइक्रोबायोम डायवर्सिटी को नुकसान पहुंचाता है और आंतों में सूजन पैदा करता है। इससे कैंसर के पनपने का खतरा बढ़ता है। रिपोर्ट्स में सामने आया है कि 2013 से कोलन कैंसर का खतरा 3 % हर साल बढ़ा रहा है।
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कोलन कैंसर पनपने का एक और बड़ा कारण फाइबर की कमी हो भी माना जा रहा है। ज्यादातर महिलाएं अपने दिनभर के फाइबर इनटेक का 15 % ही लेती हैं। जबकि कोलन में मौजूद बैक्टीरिया को करीब 25% फाइबर की जरूरत होती है। फाइबर की कमी आंतों को नुकसान पहुंचाती है और इससे कैंसर का खतरा बढ़ता है।
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आजकल महिलाओं में क्रोनिक स्ट्रेस बढ़ रहा है। कार्टिसोल के स्तर बढ़ने से आंतों में सूजन आने लगती है, जिससे आंतों के माइक्रोबायोम और कोलन लाइन भी प्रभावित होती है। कोलन कैंसर के कारण मौत के आंकड़े भी बढ़ रहे हैं।
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महिलाओं में 30 साल की उम्र में कोलन कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इसका एक बड़ा कारण ये भी है कि कैंसर के लक्षणों की पहचान शुरुआत में नहीं हो पाती और न ही इसके टेस्ट और स्क्रीनिंग के लिए लोग सलाह देते हैं। कोलन कैंसर के ज्यादातर मामले 55 साल की उम्र से पहले सामने आ जाते हैं।
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दिनभर थकान बने रहना, बिना किसी कारण के शरीर में आयरन की कमी और मल त्याग की आदतों में बदलाव हो रहा है तो आपको बिना देरी किए एक बार कोलन कैंसर की जांच करनी चाहिए। खासतौर से अगर 45 साल से कम उम्र में ये परेशानी हो रही हैं तो आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)
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