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कोलन कैंसर होने पर दिखते हैं कौन से लक्षण? डॉक्टर से जानें शुरुआत में ही कैसे लगाएं इसका पता?

 Written By: Poonam Yadav @R154Poonam
 Published : Jun 15, 2026 06:30 am IST,  Updated : Jun 15, 2026 12:11 pm IST

इन दिनों कई लोग कोलन कैंसर की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। ऐसे में चलिए डॉक्टर से जानते हैं इस बीमारी की शुरुआत में ही कैसे करें पहचान?

कोलन कैंसर - India TV Hindi
कोलन कैंसर Image Source : MAGNIFIC

कोलन कैंसर आजकल कई लोगों में देखने को मिल रही है। अगर इस बीमारी का पता शुरुआत में चल जाए, तो इसका इलाज आसान हो सकता है और मरीज जल्दी ठीक हो सकता है। इसलिए कोलन कैंसर की जल्दी पहचान बहुत जरूरी है। नई दिल्ली, में स्थित H.O.P.E. (Holistic Oncology with Patient Empathy) ऑन्कोलॉजी क्लिनिक के को-फाउंडर और डायरेक्टर डॉ. अमिश वोरा, बता रहे हैं कि शुरुआत में ही कैसे करें इस बीमारी की पहचान?

कोलन कैंसर क्या है ?

कोलन कैंसर बड़ी आंत से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। यह बीमारी बड़ी आंत के टिशूज़ से शुरू होती है। यह आंत की अंदर की परत में छोटी कोशिकाओं के रूप में विकसित होती है, जिन्हें 'पॉलीप्स' कहा जाता है। समय के साथ, ये पॉलीप्स कैंसर का रूप ले सकते है।

कोलन कैंसर के लक्षण?

कोलन कैंसर की जल्दी पहचान करना आसान नहीं होता। शुरुआत में इसके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते। पेट दर्द, कब्ज, कमजोरी, वजन कम होना या मल में खून आना जैसे लक्षण कई बार लोग सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई लोग डॉक्टर के पास समय पर नहीं जाते और जांच भी नहीं करवाते। लेकिन अगर मल से खून लगातार आ रहा है, लम्बे समय तक कब्ज हो या फिर पेट में दर्द, सूजन और मरोड़ की समस्या बढ़ जाये तो आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। इसके कारणों में खराब खानपान, मोटापा, पारिवारिक इतिहास, बढ़ती उम्र और आंतों की सूजन शामिल हैं।

इन तरीकों से लगया जा सकता है पता

अगर कोलन कैंसर का पता समय पर चल जाए, तो मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। आज के समय में विज्ञान ने इस बीमारी को पहचानने के नए तरीके खोजे हैं। कोलोनोस्कोपी और खून या मल की जांच से डॉक्टर बीमारी का जल्दी पता लगा सकते हैं। नई मशीनों और तकनीक की मदद से बीमारी को पहले से ज्यादा सही तरीके से पहचाना जा रहा है। इससे इलाज जल्दी शुरू किया जा सकता है। 

समय पर इलाज मिलने से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। इसलिए लोगों को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए, सही खाना खाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। इस बीमारी से बचाव के लिए फाइबर युक्त भोजन करें, नियमित रूप से व्यायाम करें, धूम्रपान-शराब से दूरी बनाएं रखें और समय-समय पर जांच जरूरी है। जागरूकता ही इस बीमारी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है)

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