कई बार अचानक आंखों में होने वाले बदलाव मरीज और परिवार दोनों को परेशान कर देता है। खासकर जब रात में सोते समय आंख हल्का रगड़ने के बाद ऐसा लगे कि आंख की पुतली ऊपर की ओर चली गई है, कुछ दिखाई नहीं दे रहा, फिर दोबारा हल्का रगड़ने पर आंख सामान्य हो जाए। उसके बाद आंख लाल हो जाए, छोटी लगने लगे और लगातार पानी आने लगे तो यह अनुभव डराने वाला हो सकता है। हाल ही में एक युवती के साथ ऐसा दूसरी बार हुआ। ऐसे मामलों में घबराने की बजाय कारण समझना जरूरी है।
डॉक्टर पारुल सोनी, नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं डायरेक्टर (कम्प्लीट आई केयर क्लिनिक, गुरुग्राम) सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हमारी आंखों की मूवमेंट कई मांसपेशियों और नसों के कंट्रोल में होती है। रात में या नींद के दौरान कई लोगों की आंखें थोड़ी ऊपर की ओर चली जाती हैं। इसे सामान्य भाषा में “आंख का ऊपर घूमना” कहा जा सकता है। आमतौर पर यह शरीर का एक प्राकृतिक रिफ्लेक्स होता है और चिंता की बात नहीं होती। लेकिन जब इसके साथ देखने में परेशानी, लालिमा, पानी आना या आंख छोटी महसूस होना जुड़ जाए तो जांच जरूरी हो जाती है।
आंख की पुतली घूमने का कारण
आंख रगड़ने से कॉर्निया या सतह पर इरिटेशन- नींद में आंख रगड़ने से कॉर्निया की ऊपरी परत में हल्की खरोंच या इरिटेशन हो सकती है। इससे आंख लाल हो सकती है, पानी आने लगता है और कुछ समय के लिए देखने में धुंधलापन महसूस हो सकता है।
बैल्स फिनोमिनन (Bell’s phenomenon)- कई लोगों में आंख बंद करते समय आईबॉल स्वाभाविक रूप से ऊपर की ओर घूम जाती है। अगर अचानक जागने या आंख खोलने के बीच यह महसूस हो जाए, तो व्यक्ति को लग सकता है कि पुतली ऊपर चली गई है। यह अक्सर सामान्य होता है।
ड्राई आई या एलर्जी- अगर आंख पहले से सूखी हो या एलर्जी हो, तो रगड़ने से इरिटेशन ज्यादा बढ़ सकती है। इससे लालिमा और पानी आना आम है।
आंख की मांसपेशियों का अस्थायी इंबैलेंस- कभी-कभी थकान, कम नींद या ज्यादा स्ट्रेन से आंखों की मसल्स कुछ सेकंड के लिए अलग तरह से रिएक्ट कर सकती हैं।
लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए—
- बार-बार ऐसा होना
- कुछ देर तक दिखाई न देना
- तेज दर्द
- रोशनी से परेशानी
- आंख सूजना
- सिरदर्द या चक्कर के साथ होना
क्योंकि यह घटना दूसरी बार हुई है, इसलिए आंखों की पूरी जांच कराना बेहतर रहेगा। जांच में cornea, eye pressure, tear film और eye movement को देखकर सही कारण समझा जा सकता है। ज्यादातर मामलों में यह गंभीर नहीं होता, लेकिन बार-बार होने पर इसे “सिर्फ नींद में हुआ” मानकर टालना सही नहीं है। आंखें बहुत संवेदनशील होती हैं और शुरुआती जांच से छोटी परेशानी को भी समय रहते संभाला जा सकता है।
- आंखों को जोर से रगड़ने से बचें
- अगर ड्राईनेस लगे तो डॉक्टर की सलाह से आई ड्रॉप लें
- स्क्रीन टाइम के बीच ब्रेक लें
- और अगर दोबारा ऐसा लगे, तो तुरंत आंखों के विशेषज्ञ से मिलें
आंखों से जुड़ी किसी भी असामान्य स्थिति में घबराने की बजाय सही समय पर जांच और इलाज सबसे सुरक्षित कदम है।
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