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Hindi News हेल्थ World Aids Day 2022 पर WHO चीफ का बड़ा संदेश, कहा-इस घातक बीमारी से लड़ने के लिए सबको साथ आना होगा

World Aids Day 2022 पर WHO चीफ का बड़ा संदेश, कहा-इस घातक बीमारी से लड़ने के लिए सबको साथ आना होगा

World Aids day 2022: विश्व एड्स दिवस, हर साल लोगों में इस घातक बीमारी को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। आइए, जानते हैं WHO चीफ का संदेश।

WHO_Chief- India TV Hindi Image Source : WHO WHO_Chief

World Aids day 2022: एचआईवी  एड्स (HIV AIDS) एक जानलेवा बीमारी मानी जाती है। ताजा आकड़ों की बात करें तो, दुनियाभर में इसके 33 मिलियन से अधिक रोगी हैं। एड्स, जो ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (human immunodeficiency virus) के कारण होता है, अब तक बड़ी संख्या में लोगों को अपना शिकार बना चुका है। इस साल अकेले 38.4 मिलियन लोग एचआईवी पॉजिटिव पाय गए हैं। ऐसी स्थिति को देखते हुए विश्व एड्स दिवस पर WHO चीफ जनरल टेड्रोस घेब्रेयसस (General Tedros Adhanom Ghebreyesus) का बयान आया है। 

2030 तक दुनिया को एड्स मुक्त बनाना है: WHO चीफ 

2030 तक दुनिया को एड्स मुक्त बनाने के लिए हम सभी को साथ आना होगा। इसके लिए ना सिर्फ हमें लोगों को एड्स की जांच करने के लिए जागरूक करना होगा बल्कि, उन्हें इसे लेकर शर्मिंदगी की सोच को भी हटाना होगा। ये ऐसा है कि ज्यादातर लोग एड्स का नाम सुनते ही इसके रोगी से दूर होने लगते हैं। साथ ही लोग इसकी जांच से भी बचते हैं।

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सेक्सुअल नेटवर्क में बीमारी है गहरी

WHO चीफ का साथ ही यह भी कहना है कि सेक्सुअल नेटवर्क में यह बीमारी बहुत ही गहरी है। इसे आपको ऐसे समझना होगा कि ये बीमारी वेश्यावृत्ति और होमोसेक्सुअल जैसे अलग ग्रुप में तेजी से फैला हुआ है। साथ ही कई बार मां से बच्चों में भी इस बीमारी को पाया गया है जहां इसकी जांच करके और इलाज से रोका जा सकता है। साथ ही लोगों में इसके इलाज को लेकर एक जागरूकता फैलाना भी बेहद जरूरी है। 

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों की मानें तो एचआईवी एड्स सबसे बड़ी वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। भले ही एचआईवी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बनी हुई है जो विश्व स्तर पर लाखों लोगों को प्रभावित करती है।  इसके अलावा इलाज जैसी संसाधनों की कमी, असमानता और मानवाधिकारों के प्रति अवमानना ​​सहित कई कमियों के कारण एचआईवी एक वैश्विक स्वास्थ्य महामारी बन गया जो कि आगे चल कर और बढ़ सकता है।

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ऐसे में जरूरी ये है दुनिया भर के देश अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाए और आम लोगों में इस बीमारी को लेकर जागरूकता फैलाए। साथ ही इसकी जांच के लिए भी आम लोगों को प्रेरित करें और समाज में ऐसे लोगों के प्रति भेदभाव की भावना को कम करें। 

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