नई दिल्ली: देश के असैन्य परमाणु समझौते वायु प्रदूषण घटाने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं, क्योंकि 80 फीसदी बिजली उत्पादन कोयले से होता है, जिससे काफी प्रदूषण पैदा होता है और उससे निजात पाने के लिए विकल्प तैयार करने की कोशिश जारी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल की जर्मनी, फ्रांस और कनाडा की यात्रा के दौरान भारत ने कनाडा की कंपनी कैमिको के साथ समझौता किया है, जो दुनिया की सबसे बड़ी यूरेनियम उत्पादक कंपनी है।
समझौते के तहत कैमिको अगले छह सालों तक 3,000 टन यूरेनियम की आपूर्ति करेगी, जो 1,700 मेगावाट क्षमता वाले परमाणु बिजली संयंत्रों को चालू करने के लिए काफी है। देश में अभी 5,780 मेगावाट क्षमता के परमाणु बिजली संयंत्र स्थापित हो चुके हैं।
इसी तरह का एक समझौता 2013 में उज्बेकिस्तान के साथ हुआ है। सरकार आस्ट्रेलिया के साथ भी ऐसे ही एक समझौते पर हस्ताक्षर करना चाहती है। आस्ट्रेलिया में यूरेनियम का सबसे बड़ा भंडार है। इसके अलावा रूस और कजाकिस्तान के साथ पहले ही इस तरह के समझौते हो चुके हैं।
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