देश में 43,100 मेगावाट परमाणु क्षमता वाले संयंत्र की स्थापना प्रस्तावित है, जिसके एक बड़े हिस्से का निर्माण अमेरिका, फ्रांस और रूस की कंपनियों की साझेदारी में किया जाना है, जिसके लिए ईंधन की व्यवस्था वे ही करेंगी।
शेष संयंत्रों का निर्माण सरकार करेगी, जिसके लिए ईंधन आयात करना होगा। घरेलू यूरेनियम आपूर्ति काफी कम है और उसके परमाणु हथियार बनाने जैसे कुछ अन्य उपयोग भी हैं। इसलिए सरकार उसका उपयोग पूरी तरह से बिजली उत्पादन में ही नहीं करना चाहेगी।
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