नई दिल्ली: हिंदुस्तान से हजारों किलोमीटर दूर एक सड़क पर हादसा हुआ। जिसमें एक परिवार में मातम छा गया। जिसमें हादसे में पति की मौत हो गई। पत्नी कोमा में है और डॉक्टर उसका इलाज कर रहे हैं। वही दूसरी ओर मासूम बेटा अस्पताल में दर्द से तड़प रहा है। लेकिन इनके परिवार का दर्द यही से नहीं खत्म हुआ। इस दर्द जब और बढ गया।
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जब 14 दिन बीत गए लेकिन अब तक पति के शव को दाह संस्कार की इजाजत नहीं मिली है। विदेशी कानून और गाइडलाइन के मुताबिक पति के शव को तब तक सुरक्षित रखा जाएगा जब तक पत्नी होश में नहीं आ जाती। जानिए आखिर मुंबई के पास रहनेवाले एक परिवार ने क्यों सरकार से मदद की गुहार लगाई है और उस परिवार के साथ क्या हुआ।जानिए हमारी इस स्पेशल रिपोर्ट में।
क्या है कहानी
ये तस्वीर न्यूयॉर्क की आईटी कंपनी में काम करनेवाले चंदन गवई और उनकी पत्नी मनीषा गवई की है। दोनों की इस मुस्कुराहट की एक वजह उनका 11 महीने का बेटा इबहाम भी है। हंसते मुस्कराते इन चेहरों को लेकर जो कहानी सामने आई है वो रुला देनेवाली है।
चंदन गवई अब इस दुनिया में नहीं हैं उनका शव अंतिम संस्कार के इंतजार में कफन में लिपटा है। पत्नी मनीषा गवई कोमा में हैं ना बोल सकती हैं और ना सुन और समझ सकती है। बेटा इबहाम के दोनों हाथों में फ्रैक्चर है। दर्द और दुख के पल में इस बच्चे के सिर पर हाथ फेरने के लिए ना उसके पापा हैं और ना मम्मी।
14 दिन बीत गए लेकिन न हुआ अंतिम संस्कार
मुंबई के पास कल्याण के इस परिवार के साथ अमेरिका में क्या हुआ ये भी बताएंगे लेकिन पहले ये जान लीजिए कि पति चंदन गवई की मौत के 14 दिन बीत जाने के बाद भी उनका अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका है। वजह है अमेरिकी कानून। अमेरिकी कानून कहता है कि पति के अंतिम संस्कार के लिए पत्नी की इजाजत जरूरी है और कोमा में गई पत्नी के लिए ये मुमकिन नहीं।
अब एक बेबस परिवार ने 'सरकार' से लगाई है मदद की गुहार (सुषमा ) एक सख्त विदेशी कानून। एक मजबूर भारतीय परिवार और दुख में डूबे एक परिवार की बेबसी की पूरी कहानी बताते हैं आपको..
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