ललित मोदी देश में वन-डे क्रिकेट लीग शुरु करना चाहते थे। ललित मोदी का मक़सद अमेरिका की बास्केटबॉल लीग एनबीए और यूरोप की फुटबॉल लीग की तरह क्रिकेट के ज़रिए बेशुमार पैसा कमाना था। लेकिन 1990 के दशक में भारतीय क्रिकेट में जगमोहन डालमिया की तूती बोलती थी। ललित मोदी के आइडिया को जगमोहन डालमिया ने ख़ारिज कर दिया। यहीं से बदल गई ललित मोदी की ज़िंदगी का मक़सद और उन्होंने भारतीय क्रिकेट में पांव जमाने का फ़ैसला कर लिया।
जगमोहन डालमिया से बदला लेना था, इसलिए ललित मोदी ने एक तीर से दो शिकार का खेल किया। उन्होंने 1999 में हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़ने की कोशिश की लेकिन नाकामी हाथ लगी। फिर ललित मोदी ने तरक़ीब भिड़ाई ललित मोदी ने राजस्थान का रुख़ किया, वो भी अपने एक स्कूल के दोस्त के सहारे जिसकी वसुंधरा राजे से अच्छी जान-पहचान थी। वहीं शरद पवार से भी ललित मोदी ने रिश्ते जोड़ने का खेल शुरू कर दिया।
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