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pics : 'ललित' लीला अंदाज़ ऐसा कि शहंशाह भी शरमा जाएं

नई दिल्ली: आज हम आपको बताने जा रहे है ललित मोदी के बारे में। अहंकार हमेशा आसमान से ऊंचा, ज़िद्दी ऐसा कि हर बात मनवा कर दम ले, अकड़ ऐसी कि दूसरा उसके सामने बौने

 
2003 में राजस्थान में वसुंधरा राजे की सरकार बनी। मोदी परिवार और राजे परिवार में पुराने रिश्ते थे, लेकिन ललित मोदी और वसुंधरा में दोस्ती नहीं थी। इसके लिए ललित मोदी ने अपने स्कूली दोस्त का इस्तेमाल किया और जयपुर में ललित मोदी के क़दम पड़े लेकिन ललित मोदी के क़दम पड़ते दोस्त सीन से आउट हो गया। अब वक्त था, भारतीय क्रिकेट में ललित लीला के शुरु होने का, क्योंकि जयपुर के रास्ते स्टेज सज चुका था। जयपुर में ललित मोदी ने दो काम किए पहला क्रिकेट और कारोबार को एक बना दिया और दूसरा, ख़ुद राजस्थान में दूसरे पावर सेंटर बनकर उभरे। इस समय ललित मोदी का जयपुर में ठिकाना यानी रामबाग पैलेस सत्ता का सबसे मुकम्मल पता था।

ललित मोदी ने सबसे पहले राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन पर कब्ज़ा किया। इसके लिए नागौर से वो आरसीए के सदस्य बने। इसके लिए भी ललित मोदी ने फ़र्जीवाड़ा किया क्योंकि उनका नाम सिर्फ़ ललित कुमार दर्ज था और उनके पास राजस्थान का कोई स्थाई पता भी नहीं था। बावजूद इसके 2005 में आरसीए के चुनाव हुए तो ललित मोदी ने ताक़त का सारा खेल कर दिया। किशोर रुंगटा ग्रुप को औकात दिखाने के लिए ललित मोदी ने अध्यादेश लाकर आरसीए के 66 सदस्यों के वोटिंग अधिकार छिन लिया। ललित मोदी आरसीए के अध्यक्ष बन गए।

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