याकूब मेमन को फांसी, 22 साल बाद मिली मुंबई ब्लास्ट दोषी को सजा
नागपुर: 1993, मुंबई ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन को आज सुबह ठीक 7 बजे फांसी पर लटका दिया गया। करीब 10 मिनट तक चली फांसी की इस प्रक्रिया के दौरान 6 पुलिस ऑफिर मौजूद थे। फांसी

नागपुर: 1993, मुंबई ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन को आज सुबह ठीक 7 बजे फांसी पर लटका दिया गया। करीब 10 मिनट तक चली फांसी की इस प्रक्रिया के दौरान 6 पुलिस ऑफिर मौजूद थे। फांसी से पहले याकूब में बचने ने लिए हर संभव प्रयास किया। भारत के इतिहास में पहली बार एक अपराधी की याचिका पर अंतिम बार सुनवाई के लिए देर रात 3 बजकर 20 मिनट पर दोबारा कोर्ट लगी फिर से सुनवाई हुई लेकिन याकूब की याचिका को एक फार फिर न कहा गया। आपको बता दें इससे पहले नागपुर जेल में कैद किसी अपराधी को 30 साल पहले फांसी दी गई थी। आंकड़ों के हिसाब से इस जेल में कैद कुल 23 अपराधियों को सूली पर चढ़ाया जा चुका है।
याकूब मेमन केस - इतिहास में पहली बार रात में लगी अदालत
यह हिंदुस्तान के इतिहास में पहला मौका है जब किसी अपराधी की अंतिम सुनवाई के लिए रात 3 बजकर 20 मिनट पर अदालत लगानी पड़ी हो। देर रात तक याकूब के वकील अपनी दलीले देते रहे, लेकिन आखिरकार एक बार फिर से मेमन की याचिका को खारिज कर दिया गया।
याकूब की फांसी से पहले क्या क्या हुआ-
- नागपुर की जेल में सुबह 7 बजे याकूब मेमन को फांस पर लटकाया गया।
- याकूब के वकील रात 12: 30 बजे चीफ जस्टिस के घर पहुंचे, तड़के तीन बजे सुनवाई शुरू हुई, सुबह 5 बजे एक बार फिर ये याकूब की याचिका खारिज।
- कोर्ट ने याकूब मेमन का डेथ वारंट बरकरार रखा, रात 11 बजे राष्ट्रपति ने भी दया याचिका ठुकराई।
- याकूब की अर्जी पर बुधवार सुबह 10: 30 बजे से दोपहर 4: 15 बजे तक सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।
फांसी से पहले याकूब ने क्या किया-
बताया जा रहा है कि, याकूब मेमन रात भर जागता रहा। सुबह उसे नए कपड़ें दिए गए। फिर उसे नाश्ता दिया गया, लेकिन याकूब ने खाने से इन्कार कर दिया। बाद में याकूब ने फर्ज़ (सुबह) की नमाज़ पढ़ने की गुज़ारिश की जिसे जेल प्रशासन ने माना। उसने बाद में कुरान शरीफ भी पढ़ी। याकूब के घर वाले भी जेल पहुंच गए थे। इससे पहले देर रात नागपुर पुलिस के जवान ने याकूब की फैमिली को कॉन्फीडेंशियल लैटर होटल में ले जाकर दिया। इस बीच नागपुर जेल के बाहर 500 मीटर तक धारा 144 लगाई गई।
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1993 ब्लास्ट की टाइमलाइन, जाने कब क्या हुआ
12 मार्च 1993: सिलसिलेवार 12 जगहों पर हुए धमाकों में 257 लोग मारे गए जबकि 713 लोग घायल हुए। बॉम्बे स्टॉक एक्सेंज की 28-मंज़िला इमारत की बेसमेंट में दोपहर 1.30 बजे धमाका हुआ जिसमें लगभग 50 लोग मारे गए थे। इसके आधे घंटे बाद एक कार धमाका हुआ और अगले दो घंटे से कम समय में कुल 13 धमाके हो चुके थे।
19 अप्रैल 1993: जांच एजेंसियों ने संजय दत्त को AK-56 रखने पर गिरफ्तार किया। एजेंसियों ने अपनी जांच में पाया था कि बम धमाकों से पहले हथियारों की खेप भारत लायी गई थी, जिसके तहत संजय दत्त के पास से ये हथियार मिला।
26 अप्रैल 1993: मुंबई में टाडा की विशेष अदालत में संजय दत्त ने AK-56 रखने की बात कबूली।
3 मई 1993: संजय दत्त को कोर्ट से जमानत मिल गई।
4 नवंबर 1993: 10,000 पन्ने की 189 लोगों के खिलाफ प्रार्थमिक चार्जशीट दायर की गई
19 नवंबर 1993: मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया।
4 जुलाई 1994: संजय दत्त की जमानत रद्द, दोबारा हुई गिरफ्तारी। कोर्ट ने उनके जुर्म को गंभीर करार दिया। इसके बाद संजय दत्त 18 महीने जेल में रहे।
19 अप्रैल 1995: मुंबई की टाडा अदालत में इस मामले की सुनवाई आरंभ हुई। अगले दो महीनों में अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय किए गए।
16 अक्टूबर 1995: संजय दत्त को कोर्ट से जमानत मिल गई।
जुलाई 2007: टाडा अदालत ने जुलाई 2007 में संजय दत्त को 9 एमएम पिस्टल और AK-56 रखने पर आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाया. AK-56 रखने पर कोर्ट ने 6 साल जेल की सजा सुनाई।
2 अगस्त 2007: कोर्ट ने अगस्त 2007 में संजय दत्त को दोबारा हिरासत में लेने का आदेश दिया. इस बार उन्हें पुणे की यरवदा जेल में रखा गया.
20 अगस्त 2007: संजय दत्त को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई।
अक्तूबर 2000: सभी अभियोग पक्ष के गवाहों के बयान समाप्त हुए।
अक्तूबर 2001: अभियोग पक्ष ने अपनी दलील समाप्त की।
सितंबर 2003: मामले की सुनवाई समाप्त हुई।
सितंबर 2006: अदालत ने अपने फैसले देने शुरु किए। इस मामले में 123 अभियुक्त हैं जिनमें से 12 को निचली अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई थी। इस मामले में 20 लोगों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई गई थी जिनमें से दो की मौत हो चुकी है और उनके वारिस इस मुकदमा लड़ रहे हैं। इनके अलावा 68 लोगों को उम्र कैद से कम की सज़ा सुनाई गई थी जबकि 23 लोगों को निर्दोष माना गया था।
नवंबर 2006: संजय दत्त को पिस्तौल और AK-56 राइफल रखने का दोषी पाया गया था। लेकिन उन्हे कई अन्य संगीन मामलों में बरी किया गया।
नवंबर 1, 2011: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरु हुई जो दस महीने चली।
अगस्त 2012: सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा।
21 मार्च 2013: सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए संजय दत्त को 5 साल जेल की सजा सुनाई।
May 2014: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने याकूब मेमन की दया याचिका खारिज की
April 9, 2015: सुप्रीम कोर्ट ने याकूब मेमन की पुन: विचार याचिका खारिज की
July 21, 2015: सुप्रीम कोर्ट ने याकूब क्यूरेटिव याचिका खारिज की
July 29, 2015: सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई धमाकों के दोषी याकूब मेमन की फांसी पर रोक लगाने से किया इनकार
July 29, 2015: याकूब मेमन ने फिर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से दया की अपील
10.45 PM: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने याकूब मेमन की दया याचिका खारिज की
03.20 AM: पहली बार रात 3:20 बजे लगी कोर्ट, डेढ़ घंटे सुनवाई
04.50 AM: याकूब की याचिका खारिज
06.30 AM: फांसी पर लटका 1993 ब्लास्ट का मुख्य आरोपी मेमन
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