नई दिल्ली: आजादी के बाद भारत में पहली फांसी नाथूराम गोडसे को दी गई थी और मेमन से पहले आखिरी बार फांसी की सजा संसद भवन पर हमले के दोषी अफजल गुरु को दी गई थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1947 के बाद से देश में अब तक कुल 56 लोगों को फांसी दी गई है और याकूब मेमन भारत में फांसी की सजा पाने वाला 57वां अपराधी है।
अगर हम पिछले 10 साल की बात करें तो भारत में 1303 लोगों को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। इसमें से सिर्फ तीन धनंजय चटर्जी (2004), अफजल गुरु (2013) और 26/11 मुंबई हमले के आरोपी पाकिस्तानी नागरिक आमिर अजमल कसाब (2012) को फांसी पर लटकाया गया। भारत में इस तरह से हर साल लगभग 130 लोगों को फांसी की सजा तो मिलती हैं, पर अमल में नहीं लाई जाती। वजह भारत में सजा माफी की लंबी प्रक्रिया का चलना है।
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UP में 395 को फांसी की सजा, लेकिन फंदे पर नहीं झूला कोई
भारत में राज्यवार आंकड़ों को देखें तो सबसे ज्यादा फांसी की सजा उत्तर प्रदेश में सुनाई गईं। उत्तर प्रदेश में कुल 395 लोगों को फांसी की सजा हुई। ये अलग बात है कि अभी तक किसी भी अपराधी पर फांसी की सजा अमल में नहीं लाई गई। उत्तर प्रदेश के बाद बिहार में 144, महाराष्ट्र में 129, तमिलनाडु में 106 और कर्नाटक में 103 लोगों को मौत की सजा दी जा चुकी हैं।
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