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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- "सिब्बल जी, सुबह कुत्ता किस मूड में है, ये कैसे पता चलता है?", आवारा पशुओं पर हुई सुनवाई

Reported By : Gonika Arora, Atul Bhatia Edited By : Malaika Imam Published : Jan 07, 2026 02:31 pm IST, Updated : Jan 07, 2026 02:39 pm IST

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, आप कुत्तों की बात कर रहे हैं, लेकिन मुर्गियों और बकरियों के बारे में क्या? कपिल सिबल ने जवाब दिया, इसी वजह से मैंने मुर्गियां खाना छोड़ दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से संबंधित मामले की सुनवाई की।- India TV Hindi
Image Source : FILE (PTI) सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से संबंधित मामले की सुनवाई की।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा कुत्तों और सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों के मुद्दे पर जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच के सामने सुनवाई हुई। बेंच ने कहा कि आज हम आपके समर्थकों और विरोधियों दोनों की बात सुनेंगे। आज आपके लिए हमारे पास पूरा समय है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में राजस्थान में आवारा पशुओं के कारण दो न्यायाधीशों की गंभीर सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। कोर्ट ने बेहद चिंताजनक लहजे में कहा कि पिछले 20 दिनों में जानवरों की वजह से न्यायाधीशों के साथ दो हादसे हुए हैं। इनमें से एक न्यायाधीश रीढ़ की गंभीर चोट से जूझ रहे हैं।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों पर कोर्ट ने सवाल उठाए। NHAI ने लगभग 1400 किलोमीटर के संवेदनशील हिस्सों की पहचान की है, जहां मवेशी सड़कों पर आ जाते हैं। NHAI के इस तर्क पर कि आगे की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है, कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा, "NHAI खुद इन संवेदनशील रास्तों की घेराबंदी या फेंसिंग क्यों नहीं कर सकता? सड़क पर मवेशियों को आने से रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जा रहे?"

राज्यों का लचर रवैया, एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट

मामले में कोर्ट की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने अदालत को सूचित किया कि पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) ने नवंबर 2025 में कुत्तों की नसबंदी और आवारा जानवरों को हटाने के लिए एक SOP जारी की है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और पंजाब जैसे राज्यों ने अभी तक अपना हलफनामा दाखिल नहीं किया है। साथ ही, राजस्थान और ओडिशा जैसे राज्यों द्वारा सहयोग न किए जाने की बात भी सामने आई है।

एमिकस क्यूरी ने कहा कि आवारा पशुओं को शेल्टर होम में रखने के लिए बुनियादी ढांचे और नसबंदी (ABC) केंद्रों के लिए मैनपावर की भारी कमी है। पशु कल्याण बोर्ड ने सुझाव दिया है कि भविष्य में आबादी नियंत्रण के लिए पहले नर कुत्तों की नसबंदी की जानी चाहिए। कोर्ट ने उन राज्यों की सूची मांगी है जिन्होंने अब तक जवाब दाखिल नहीं किया है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अगर किसी सोसाइटी के बहुमत कुत्तों को बाहर करना चाहता है तो उसका सम्मान होना चाहिए। कुछ लोगों की चलने दी गई तो कोई यह भी कह सकता है कि वह सोसाइटी में भैंस रखना चाहता है।

"इसी वजह से मैंने मुर्गियां खाना छोड़ दिया है"

पशु प्रेमियों की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिबल ने अदालत में कुत्ते प्रेमियों का बचाव किया। अदालत ने पूछा, आप कुत्तों की बात कर रहे हैं, लेकिन मुर्गियों और बकरियों के बारे में क्या? सिबल ने जवाब दिया- इसी वजह से मैंने मुर्गियां खाना छोड़ दिया है। सिबल ने कहा कि मुझे आज तक किसी कुत्ते ने नहीं काटा।

अमीकस क्यूरी ने राज्यों की तैयारियों पर कड़ी नाराज़गी जताई। अमीकस ने महाराष्ट्र सरकार के आंकड़ों का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में आवारा कुत्तों की संख्या 1 लाख से ज्यादा है। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए सरकार को हर नगर निकाय क्षेत्र में शेल्टर बनाने पर गंभीरता से विचार करना होगा। अमीकस ने कोर्ट को बताया कि यही इस समस्या की असली तस्वीर है और इसी वजह से कई राज्यों के हलफनामे बहुत निराशाजनक हैं।

याचिकाकर्ता वंदना जैन की दलील

उन्होंने 2024 में इंदौर हाई कोर्ट में PIL दायर की थी। हाई कोर्ट से एबीसी रूल्स (कुत्तों की नसबंदी नियम) को सख्ती से लागू करने का आदेश मिला, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं किया।

वंदना जैन ने कहा, "मैं कुत्तों से प्यार करती हूं, लेकिन मैं इंसानों से भी प्यार करती हूं।" उन्होंने कहा कि कुत्तों की सही संख्या का डेटा ही नहीं है। आम लोगों में कुत्तों के व्यवहार को लेकर जागरूकता की भारी कमी है। लोग यह तक नहीं जानते कि आवारा कुत्तों की शिकायत का हेल्पलाइन नंबर क्या है। उन्होंने कहा कि आवारा कुत्ते उन्हें नहीं काटते जो उनके साथ दया से पेश आते हैं। कुत्तों की आबादी इसलिए कंट्रोल नहीं हो पा रही, क्योंकि नसबंदी के बजाय उन्हें मारने पर ध्यान दिया जा रहा है। एनिमल लवर्स भी भारत के नागरिक हैं और देश की सेवा कर रहे हैं।

वंदना जैन ने कोर्ट के सामने कुछ सुझाव रखे

ज्यादा जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएं। विदेशी और महंगे कुत्तों पर लग्जरी टैक्स लगाया जाए, ताकि लोग देशी कुत्तों को अपनाएं। किसानों को प्रोत्साहित किया जाए कि वे खेतों की सुरक्षा के लिए कुत्ते रखें, जिससे आवारा जानवरों से फसल बचे। उन्होंने बताया कि इंदौर में ही 50,000 से ज्यादा डॉग बाइट के मामले सामने आ चुके हैं।

...लेकिन सभी कुत्ते एक जैसे नहीं होते: कपिल सब्बल

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बात सिर्फ कुत्तों के काटने की नहीं है। कुत्ते वाहनों, खासकर दोपहिया वाहनों और साइकिलों के पीछे दौड़ते हैं। दुर्घटनाएं हो सकती हैं। क्या आपने कभी दोपहिया वाहन चलाया है, श्री सिबल? इस पर कपिल सिबल ने कहा- हां, कुछ इलाकों में ऐसा होता है, लेकिन सभी कुत्ते एक जैसे नहीं होते। सुप्रीम कोर्ट ने कहा,  सुबह कौन-सा कुत्ता किस मूड में है, आपको कैसे पता चलता है? सिबल ने कहा, तो क्या सभी कुत्तों को आश्रय स्थल में रखना ही समाधान है? सुप्रीम कोर्ट  ने कहा कि हम ऐसा नहीं कह रहे हैं, लेकिन कुत्ते हर जगह सड़कों पर क्यों होने चाहिए?

कल भी जारी रहेगी सुनवाई

एक वकील ने कोर्ट को बताया कि शहरों में हजारों डॉग बाइट की घटनाएं हो चुकी हैं। ग्रुप हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले अभिषेक कुसुम गुप्ता ने कहा कि हमारी सोसायटी हमारी प्रॉपर्टी है, फैसले का हक हमें मिलना चाहिए। यूपी सरकार के अधिकारी बात नहीं सुनते। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हालात सबसे खराब हैं। मेरी बेटी को 7–8 कुत्तों ने काटा था, यह बड़ी खबर बनी थी। उन्होंने मांग की कि सोसायटी से कुत्तों को हटाया जाए, ताकि बच्चे सुरक्षित बाहर खेल सकें।

जस्टिस जे. नाथ ने कहा कि कोर्ट इन घटनाओं से वाकिफ है और अब ठोस समाधान चाहती है, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

कुत्तों को मारना हल नहीं है: कपिल सिब्बल

कपिल सिब्बल ने कहा, "यह मामला लड़ाई का नहीं है। अगर एक जानवर हमला करता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि सभी जानवरों को बंद कर दिया जाए। जब जज ने दूसरे जानवरों का उदाहरण दिया, तो सिब्बल ने कहा कि जानवरों के साथ सहानुभूति जरूरी है। सिब्बल ने कहा कि कुत्तों को मारना हल नहीं है। उन्हें पकड़ो, नसबंदी करो, टीका लगाओ, वापस छोड़ो। मॉडल अपनाने की बात कही। इससे कुत्तों की संख्या कम होती है। कई जगह यह तरीका कामयाब रहा है। बीमार कुत्तों को बंद करने से खतरा और बढ़ सकता है।

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