ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (OUP) इंडिया ने छत्रपति शिवाजी महाराज से संबंधित आपत्तिजनक और अपुष्ट सामग्री को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। यह सामग्री वर्ष 2003 में प्रकाशित जेम्स लेन की किताब "Shivaji: Hindu King in Islamic India" में शामिल थी। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने बॉम्बे हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है।
"सत्यापन की कसौटी पर खरे नहीं उतरे"
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर स्वीकार किया कि किताब के कुछ पन्नों पर लिखे गए दावे बाद में सत्यापन की कसौटी पर खरे नहीं उतर सके। प्रेस ने कहा कि इन बयानों को प्रकाशित करने पर उन्हें खेद है और इससे जिन लोगों की भावनाएं आहत हुईं, उनके प्रति वह क्षमा चाहता है।
यह माफी छत्रपति शिवाजी महाराज के 13वें वंशज उदयनराजे भोसले के साथ-साथ आम जनता से भी मांगी गई है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि किताब के पृष्ठ 31, 33, 34 और 93 पर मौजूद कुछ सामग्री अपुष्ट पाई गई।
किताब को लेकर 2004 में गहराया था विवाद
इस किताब को लेकर विवाद वर्ष 2004 में तब गहराया था, जब संभाजी ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने पुणे स्थित भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट में तोड़फोड़ की थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि संस्थान ने लेखक को शोध में सहयोग दिया था और किताब में शिवाजी महाराज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने अपने नोटिस में दोहराया है कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से जुड़े तथ्यों को प्रस्तुत करते समय सटीकता और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है। प्रेस ने इस मामले में हुई चूक के लिए खेद जताते हुए भविष्य में अधिक सतर्कता बरतने का आश्वासन दिया है।
ये भी पढ़ें-
उत्तर भारत में 'कोल्ड टॉर्चर', दिल्ली-NCR से बिहार तक ठिठुरन; तीन राज्यों में बारिश की चेतावनी