Vastu Tips to Protect Evil Eye: घर में खुशियां, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे यह हर कोई चाहता है, लेकिन बार-बार परेशानियां पीछा करती चली आती हैं। बिना किसी स्पष्ट कारण के घर में तनाव, बीमारियां, आपसी कलह या आर्थिक परेशानियां बढ़ने लगती हैं। ऐसे में व्यक्ति का कहीं मन नहीं लगता, जिसका असर उसकी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ पर पड़ता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, ऐसी स्थितियों के पीछे बुरी नजर या नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव हो सकता है। अगर समय रहते इसका समाधान न किया जाए, तो इसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान और पारंपरिक वास्तु उपाय अपनाकर घर को बुरी नजर से सुरक्षित रखा जा सकता है। यहां जानिए ऐसे ही कुछ सरल लेकिन बेहद असरदार उपायों के बारे में।
मुख्य द्वार पर बनाएं शुभ चिन्ह
वास्तु के अनुसार, घर का मुख्य द्वार ऊर्जा का प्रवेश द्वार होता है। बुरी नजर से बचाव के लिए प्रवेश द्वार पर सिंदूर से स्वास्तिक, ॐ आदि शुभ चिन्ह बनाएं। यह पॉजिटिव एनर्जी को आकर्षित करता है और नकारात्मकता को अंदर आने से रोकता है।
नींबू और हरी मिर्च का टोटका
शनिवार या मंगलवार को मुख्य द्वार पर नींबू और सात हरी मिर्च लटकाएं। वास्तु के अनुसार, यह उपाय बुरी नजर को सोखने में कारगर माना जाता है और साइंस कहता है इसकी गंध कीड़ों को दूर भगाती है। हालांकि, हर सप्ताह इसे बदल देना चाहिए।
काला धागा बांधने का उपाय
मुख्य द्वार के हैंडल या दहलीज पर काला धागा बांधना भी नजर दोष से बचाव करता है। काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करने में मदद करता है।
कपूर और गुग्गल से करें धूनी
रोज शाम कपूर और गुग्गल की धूनी पूरे घर में दें। इसकी खुशबू वातावरण को शुद्ध करती है और नकारात्मक शक्तियों का नाश करती है।
नमक-फिटकरी से करें ऊर्जा शुद्ध
वास्तु में नमक और फिटकरी नेगेटिव एनर्जी सोखने वाले तत्व माने जाते हैं। सप्ताह में दो बार पोंछे के पानी में सेंधा नमक मिलाकर घर साफ करें। साथ ही बाथरूम के कोने में कांच के कटोरे में फिटकरी रखें, इससे नजर दोष कम होता है।
मोर पंख से हटेगी बुरी नजर
धार्मिक रूप से मोर पंख बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, वहीं इसे वास्तु में भी बेहद शुभ माना गया है। जिसके अनुसार लिविंग रूम या मुख्य द्वार के पास तीन मोर पंख लगाने से बुरी नजर का प्रभाव कम होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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